छुट्टिया और ऋषिकेश में आत्म चिंतन

जीवन की इस आपाधापी मे इंसान एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ मे लगा हुआ है। इस होड़, इस प्रतिस्पर्धा मे इंसान अपनी बुनियादी चीजों को भूल चुका है। मै भी कोई अपवाद नही हूँ, इस दौड़ मे मै भी शामिल हूँ, लेकिन साल मे एक महीना जब मै छुट्टियों पर होता हूँ, काफी दार्शनिक टाइप का हो जाता हूँ। इसे मेरा स्वार्थ कहें अथवा सहूलियत, इन छुट्टियों मे आत्म चिंतन का अच्छा मौका मिलता है। इस समय ना तो किसी प्रोजेक्ट की डैडलाइन का डर, ना कोर कमिटी की मीटिंग्स की बागडोर, ना स्टीयरिंग कमिटी के प्रजेन्टेशन की चिन्ता और ना ही प्रोजेक्ट बेसलाइन एलाइन करने की टेंशन । सारी टेंशन से मुक्ति के बाद सिर्फ़ एक ही काम होता है, ज्यादा से ज्यादा समय परिवार के साथ बिताया जाए। ज्यादा से ज्यादा (दर्शनशास्त्र सम्बंधित) पुस्तकें पढी जा सकें और अधिक से अधिक समय आत्मचिंतन किया जा सके।

आजकल मेरा प्रवास ऋषिकेश मे है (इस ब्लॉग पोस्ट के लिखे जाने तक), यहाँ के दयानंद आश्रम मे गंगा के किनारे बैठा हूँ । सामने ऊँचे ऊँचे पहाड़ों के सौंदर्य और नीचे बहती गंगा के तेज प्रवाह बहाव को देखने का मजा अलौकिक है। आसपास का वातावरण बहुत ही शान्त है सिवाय कलकल करती गंगा की बहती धारा की मधु्र ध्वनि । कुल मिलाकर माहौल अत्यंत ही लुभावना है, आत्मचिंतन के लिए एकदम सटीक। इस बहती धारा को देखकर लगता है कि हमारा जीवन भी कितनी तेजी से गुजरा जाता है। ये जीवन क्या है? क्या हमने कभी अपने आप से यह सवाल किया है? सुबह होती है, और हम एक अंधी दौड़ मे भाग लेने के लिए तैयार होते है, सुबह से शाम तक बस दौड़ते ही रहते है, रात होते ही दिन भर की थकान और टेंशन से नींद को बुलाने की कोशिश करते करते कब सुबह हो जाती है पता ही नही चलता। कभी अपने आप से सवाल करने का समय ही नही मिलता। कभी भी आत्म चिंतन नही करते। लेकिन मुझे लगता है कभी कभी एकांत मे बैठकर अपने मन के साथ मौन संवाद करके भी आत्मचिंतन से सम्बंधित ढेर सारे सवालों का जवाब पाया जा सकता है। यदि आपको समय मिले तो एकांत मे बैठकर अपने मन से पूछे कि मै कौन हूँ? जीवन क्या है? इस जीवन का क्या महत्व है?

जीवन क्या है?

क्या हमने कभी अपने आप से यह प्रश्न किया है? शायद हम सभी अपने आप से यह प्रश्न पूछने से डरते है, क्योंकि जिसे हम जीवन समझते है, इस प्रश्न के पूछने से वह और अस्त व्यस्त हो सकता है।हम पागलों की तरह धन, ख्याति इकट्ठे करते चले जा रहे है, लेकिन जब भी आत्मचिंतन का वक्त आता है, हम अपने आपको समझाते है, जल्दी क्या है, इस प्रश्न को हम बाद मे पूछ लेंगे। बचपन तो चलो चंचल होता है, अल्हड़पन भी किसी की नही सुनता, जवानी मे कोई सुध ही नही होती, बचा अधेड़ावस्था उसमे हम सवाल को टालते रहते है और बुढापे तक हम इस सवाल को पूछने की हिम्मत नही जुटा पाते। इस सवाल को जवाब हमे दूसरों से नही अपने आप से पूछना है।चलिए आप भी अपने आप से पूछिए, तब तक मै भी इस खूबसूरत नज़ारों को अपनी नजरों मे कैद करने की कोशिश करता हूँ।

( यदि आप लोगों ने टिप्पणियों के जरिए अपनी राय और प्रोत्साहन व्यक्त किया तो , इस चिंतन को आगे भी जारी रखेंगे )

आजकल भारत यात्रा पर

जून का महीना शुरु होते ही कुवैत में छुट्टियों का मौसम शुरु हो जाता है। सभी लोग अपने अपने हिसाब से बाहर जाने का प्रोग्राम बनाने लगते है। अब चूंकि हम मार्च के महीने मे ही भारत यात्रा कर चुके थे, इसलिए इस बार हमारे एजेडे मे यूरोप जाने का प्रोग्राम था। लेकिन अंतिम समय मे यूरोप यात्रा का प्रोग्राम कैंसिल हो गया और हम परिवार सहित भारत यात्रा पर निकल लिए। हम दिल्ली मे १३ जून को लैंड किए थे और अभी लगभग एक महीना भारत मे ही रहेंगे। कुछ जरुरी काम निबटाने के साथ साथ इस बार जम कर घूमने की सोची है। इस अवधि मे मेरा सम्पर्क सूत्र मेरा इमेल ही रहेगा। इस बार की यात्रा में दिल्ली के साथ रुड्की,हरिद्वार, ऋषिकेश,देहरादून्, मंसूरी, कानपुर,ग्वालियर, भोपाल और जयपुर का नाम एजेंडे मे है, देखते है कितनी जगह् कवर हो सकती है।

मै अपनी इस भारत यात्रा के अनुभव आपसे शेयर करने की पूरी पूरी कोशिश करुंगा। अभी के लिए सिर्फ इतना ही।

म्युचल फंड का फंडा : 3

साथियों पिछले दो लेखो मे हमने  म्युचल फंड की प्राथमिक जानकारी और म्युचल फंड की कुछ योजनाओं के बारे मे बात की थी। आइए वहीं से आगे शुरु करते है।  मैने कोशिश की है कि अंग्रेजी शब्दों का कम से कम प्रयोग हो, लेकिन जैसा कि आपको पता ही है, कुछ तकनीकी और प्रचलित शब्दों के हिन्दीकरण करने से लेख का प्रभाव कम हो जाएगा। आशा है आप इस सम्बंध मे मेरे विचारों से सहमत होंगे। आइए म्युचल फंड के फंडे को आगे बढते है।

म्‍युचुअल फंड कितने प्रकार के होते है?

म्युचल फंड कई प्रकार के होते है। आइए म्युचल फंड के वर्गीकरण पर कुछ बात करते है।

इक्विटी फंड (Equity Funds)

इस तरह के  म्युचल फंड मुख्यत: वे फंड होते है, जिनका शत प्रतिशत निवेश, कई शेयरों मे होता है। इनमे डाइवर्सीफाइड इक्विटी सबसे अधिक प्रचलित है। शेयरों के अनुसार ही इन  म्युचल फंडो का लघु वर्गीकरण किया जाता है। जैसे डाइवर्सीफाइड इक्विटी फंड, एग्रेसिव इक्विटी फंड, मिडकैप फंड, इंडैक्स फंड, ग्रोथ फंड और विशेष इंडस्ट्री फंड (इंफ़्रास्ट्रकचर, पावर, फार्मा, तकनीक और अन्य)। इन सभी फंडों का निवेश शेयर बाजार मे ही होता है। लेकिन इन सभी फंडो मे जोखिम शेयर बाजार की तुलना मे कम होता है। इस प्रकार के फंडो मे रिटर्न, जोखिम के समानुपाती होता है।

हाइब्रिड फंड (Hybrid Funds)

हाइब्रिड फंडो मे मुख्यत: बैलेंस फंड होते है। इन म्युचल फंडो की पूँजी का निवेश का कुछ हिस्सा शेयर बाजार मे होता है और कुछ हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों मे। उदाहरण के लिए कुछ बैलेंस फंड अपनी पूँजी का 40% प्रतिशत शेयर बाजार मे, शेष सरकारी और अन्य प्रतिभूतियों मे लगाते है। इस तरह से म्युचल फंड के निवेशकों पर शेयर बाजार के उतार चढावों का असर 40% तक ही सीमित रह जाता है। किसी भी निवेशक को अपने पोर्टफोलियों का कुछ हिस्सा इस तरह के बैलेंस फंड मे जरुर रखना चाहिए।

आय फंड

इस तरह के म्युचल फंडो का निवेश सुरक्षित सरकारी प्रतिभूतियों मे होता है। इस निवेश मे रिटर्न अधिक नही होता, लेकिन पूँजी सुरक्षित अवश्य रहती है। इसमे मासिक आय स्कीमें काफी प्रचलित है।

अन्य तरह के फंड

इस तरह के फंड विशेष परिस्थिति, कमोडिटी अथवा विशिष्ट व्यवसाय/उद्योग मे पैसा लगाते है। जैसे इंफ़्रास्ट्रकचर, रियल स्टेट, पावर, फार्मा, तकनीक और अन्य। कुछ फंड विशेष कमोडिटी मे भी पैसा लगाते है। कुछ फंड एक अलग तरह का विचार रखते है, वे किसी शेयर पर पैसा ना लगाकर, सिर्फ़ म्युचल फंडो पर ही पैसा लगाते है, इनको फंड ऑफ फंड कहा जाता है। कुछ फंड विश्व के अन्य बाजारों/अर्थव्यवस्थाओं मे पैसा लगाते है इनमे ब्रिक फंड (B razil, R ussia, I ndia, C hina and K orea ) प्रमुख है। कुछ फंड विशेष परिस्थिति जैसे नए शेयरों मे, बाजार के उलट (Contra) अथवा कम्पनियों के अधिग्रहण, विलय इत्यादि करने वाली कम्पनियों मे पैसा लगाते है। इन सभी फंडो का उद्देश्य, विशिष्ट परिस्थिति मे होने वाले निवेश के लाभों को निवेशकों तक पहुँचाना होता है।

किस तरह के फंड मे निवेश करें?

यह सवाल जितना सरल है, जवाब उतना ही कठिन। प्रत्येक निवेशक की निवेश परिस्थितियां, निवेश स्तर, जोखिम उठाने की क्षमता अलग अलग होती है। इसलिए इसका जवाब भी अलग अलग तरह के निवेशकों के लिए अलग अलग हो सकता है। लेकिन सामान्य तौर पर मै निवेशकों को अपने निवेश को तीन हिस्सों मे बाँटने की सलाह दूंगा।

50% इक्विटी फंड मे (जिसमे एग्रेसिव और मिडकैप/स्मालकैप का अनुपात आपकी जोखिम क्षमता के अनुसार हो)

20% विशेष स्थिति/इंडस्ट्री फंड मे ( अपार सम्भावनाओं वाले उद्योगों पर विशेष ध्यान दें)

25% हाइब्रिड फंडो (बैलेंस फंड मे)

शेष आप आय फंड मे निवेश कर सकते है।लेकिन जैसा कि मैने पहले भी बताया कि प्रत्येक निवेशक को अपनी परिस्थितियों और अपने जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन जरुर करना चाहिए और उसी के अनुसार निवेश करना चाहिए।

एक निवेशको को म्यूचल फंड मे निवेश करते समय क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

  • म्युचल फंड के खर्चे किस प्रकार के होते है?
  • म्युचल फंड की किसी भी स्कीम का चुनाव कैसे करें?

इस बारे मे अगले लेख मे बात करेंगे। आपको यह लेख कैसा लगा, अपनी राय से अवगत कराना मत भूलिएगा।

धन्यवाद गूगल एडसेंस

आज का दिन एक अच्छी खबर लाया। आज गूगल की तरफ़ से एडसेंस की पहली कमाई ( 100 डालर) का चैक आ गया। मेरा पन्ना पर एडसेंस लगभग 20 फरवरी के आसपास लगाए गए थे। गूगल द्वारा भेजी गयी यह कमाई फरवरी से अप्रैल तक मेरा पन्ना पर दिखाए गए विज्ञापनों की आय है। मेरा पन्ना पर एडसेंस प्रायोगिक तौर पर लगाए गए थे। इस बारे मे विस्तार से एक पोस्ट पहले भी लिख चुका हूँ।

सबसे पहले मै अपने पाठकों का भी शुक्रिया अदा करना चाहूंगा जिन्होने मेरा पन्ना पर विश्वास बनाए रखा। इस ब्लॉग पर पिछले कुछ महीनो तक प्रतिदिन लगभग 300 पाठक आते थे, आजकल यह संख्या 450 को भी पार कर गयी है। मेरा पन्ना पर पाठकों की बढती संख्या इस बात का सबूत है कि हिन्दी के पाठक बहुत तेजी से बढ रहे है। इस ब्लॉग पर आने वाले लोगों की संख्या किसी ब्लॉग एग्रीगेटर के बजाय, सबसे ज्यादा गूगल से आती है। मेरा पन्ना की तरफ़ से गूगल को पाठक भेजने और एडसेंस द्वारा कमाई करवाने का बहुत बहुत धन्यवाद।

मेरा पन्ना पर हुई पहली कमाई को मै अक्षरग्राम नारद सहायता कोष और अन्य एग्रीगेटरों के आर्थिक सहायता कोष मे देने पर गम्भीरता पूर्वक विचार कर रहा हूँ।

म्यूचल फंड का फंडा : भाग दो

पिछले लेख मे मैने आपको म्यूचल फंड से सम्बंधित प्राथमिक जानकारी दी थी, लेकिन कई सवाल अनुत्तरित रह गए थे। आइए आज उन कुछ अनुत्तरित सवालों के बारे मे बात करते है।

लेकिन म्यूचल फंड के क्या फायदे है और ये शेयरों से किस तरह से अलग है?

म्यूचल फंड के कई फायदे है, अव्वल तो इसमे आपको कम पूँजी, कम समय और काफी कम तकनीकी जानकारी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा इसमे जोखिम भी (अपेक्षाकृत शेयर बाजार के) कम रहता है। म्यूचल फंड के फायदों को संक्षेप मे इस तरह से बताया जा सकता है:

  1. म्यूचल फंड महंगे शेयरों मे निवेश करने का सस्ता तरीका है।
  2. म्यूचल फंड मे जोखिम कम होता है क्योंकि आपका पैसा किसी एक शेयर मे ना लगाकर, कई शेयरों मे एक साथ लगाया जाता है।
  3. म्यूचल फंड पेशेवर फंड व्यस्थापकों (Fund Managers) द्वारा चलाए जाते है, जिनको शेयर बाजार की काफी अच्छी जानकारी होती है। इनको किसी भी शेयर मे प्रवेश करने और बाहर निकलने के अवसरों का बेहतर ज्ञान रहता है।
  4. म्यूचल फंड हाउस (AMCs) के पास अपनी रिसर्च टीम होती है, इनके पास शेयरों के सम्बंध मे तकनीकी जानकारी और विश्लेषण मौजूद रहता है। कुल मिलाकर इनकी रिसर्च टीम किसी भी निवेशक के मुकाबले शेयर बाजार की अधिक जानकारी रखती है।
  5. छोटे निवेशक का समय और श्रम बचता है।
  6. म्यूचल फंड की गतिविधियों पर सेबी की कड़ी नजर रहती है, इस तरह से छोटे निवेशकों के हितों को अनदेखा नही किया जाता।
  7. म्यूचल फंड मे आप निश्चित अवधि मे आटोमेटिक तरीके से (SIP) से निवेश अथवा निकासी (SWP) कर सकते है।
  8. चूँकि म्यूचल फंड बड़े स्तर पर खरीदारी करते है इसलिए उनको ब्रोकरेज और अन्य खर्चों पर भी बचत होती है।
  9. म्यूचल फंड के निवेश मे काफी ज्यादा पारदर्शिता होती है।
  10. निवेशक को किसी भी प्रकार का निवेश खाता (Demat Account) नही खोलना पड़ता।
  11. निवेशक सही समय पर किसी भी एक स्कीम से दूसरी स्कीम मे जा सकता है।

म्यूचल फंड के नुकसान

दुनिया मे कोई ऐसी चीज नही जिसके फायदे हों और उसके नुकसान ना हो। म्यूचल फंड मे भी कुछ नुकसान हो सकते है, उदाहरण के लिए:

  1. म्यूचल फंड हाउस के खर्चों पर निवेशक का नियंत्रण नही रहता।
  2. निवेशक को अपनी पसन्द के शेयर खरीदने(Customized Portfolio) का आप्शन नही रहता। निवेशको को म्यूचल फंड की किसी स्कीम को ही चुनना होता है।
  3. म्यूचल फंड की सही स्कीम का चुनाव करना भी एक टेढी खीर है।

म्यूचल फंड किस तरह से बाजार मे पैसा लगाते है।

म्यूचल फंड, अपने निवेशको द्वारा प्रदान किए गए पैसों को एक जगह एकत्रित करते है और उस फंड से शेयर बाजार मे खरीद फरोख्त करते है। चूँकि फंड हाउस काफी बड़े स्तर पर खरीद फरोख्त करते है इसलिए इनको बाजार के उतार चढावों का अच्छा ज्ञान होता है। सही समय पर शेयरों मे खरीद बिक्री की जाती है और आने वाले नफ़े-नुकसान को उसी एकत्रित फंड मे रखा जाता है। म्यूचल फंड कम्पनिया अपने खर्चो को इसी फंड से निकालती है। म्यूचल फंड के निवेश को सार्वजनिक किया जाता है और प्रतिदिन फंड को अपनी नैट एसैट वैल्यू (NAV) अर्थात हर यूनिट का खरीद और बिक्री मूल्य प्रकाशित करना होता है। इसी मूल्य पर निवेशक, म्यूचल फंड मे अपना निवेश और निकासी कर सकते है। नैट एसैट वैल्यू से किसी भी फंड के स्वास्थ्य की जाँच की जा सकती है। निवेशक को यह अधिकार है कि वह किसी भी समय अपना पैसा लेकर फंड से बाहर निकल सकता है।

क्या सेबी ने म्यूचल फंड हाउस पर कुछ नियमावली जारी की है?

अच्छा सवाल। एक निवेशको को यह सवाल जरुर पूछना चाहिए। सेबी सभी फंडो पर नज़र रखता है और समय समय पर नए दिशा निर्देश भी जारी करता है।सेबी ने फंड हाउस के लिए निम्नलिखित नियमावाली जारी की है।

  • सभी म्यूचल फंड हाउस की स्थापना भारतीय ट्रस्ट एक्ट के अंतर्गत होगी और इन फंड कम्पनियों को पेशेवर लोगों द्वारा चलाया जाएगा।
  • इन फंड हाउस का निर्दॆशकों का एक बोर्ड होगा।
  • प्रत्येक फंड हाउस की न्यूनतम पूँजी 5 करोड़ (Five Crores) होनी चाहिए।
  • फंड हाउस के ट्रस्टी और चलाने वाले अलग अलग व्यक्ति (संस्था) होने चाहिए।
  • प्रत्येक फंड हाउस को सेबी से अनुमति लेना आवश्यक है।
  • फंड हाउस को अपनी हर योजना को सेबी के पास पंजीकृत कराना अनिवार्य है।
  • फंड हाउस अपने लाभ का कम से कम 90% अपने निवेशकों मे बाँटना आवश्यक है।
  • इसके अतिरिक्त समय समय पर सेबी द्वारा प्रदान की जाने वाले दिशा निर्देशों का पालन अनिवार्य है।

म्यूचल फंड की योजनाए किस प्रकार की होती है?

म्यूचल फंड की योजनाए मुख्यत: दो प्रकार की होती है।

असीमित अवधि वाले फंड (Open Ended Funds)

इस प्रकार के फंड सभी के लिए खुले हुए होते है। निवेशक जब चाहे फंड मे निवेश अथवा विनिवेश(निकासी) कर सकते है। म्यूचल फंड निवेश के लिए प्रवेश शुल्क (Entry Load) लेती है और कभी कभी विनिवेश के लिए निकासी शुल्क(Exit Load) लेती है।

सीमित अवधि वाले फंड (Closed Ended Funds)

इस प्रकार के फंड मे निवेश की सीमा की अवधि तक निवेशक को इस फंड मे बने रहना होता है। निश्चित अवधि के उपरान्त ही निवेशक अपना पैसा इस फंड से निकाल सकता है।

  • म्यूचल फंड कितने प्रकार के होते है?
  • म्यूचल फंड के खर्चे किस प्रकार के होते है?
  • एक निवेशको को म्यूचल फंड मे निवेश करते समय क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
  • म्यूचल फंड की किसी भी स्कीम का चुनाव कैसे करें?
  • किस तरह के फंड मे निवेश करें?

इस बारे मे बात अगली बार करेंगे। इंतजार करिए अगली कड़ी का….

नोट: मेरा यह लेख मोलतोल पत्रिका पर पूर्व प्रकाशित हो चुका है।

कार्टून : हवा मे हंगामा

अगर आज के युग मे हनुमान जी होते तो हवा मे कुछ ऐसे हंगामे होते:

HanumanAir

नोट: पाठकों के लिए कुछ मजेदार खेल, इस कार्टून को देखकर आपके मन मे कुछ विचार आते है? या इस कार्टून का कोई शीर्षक नजर आता है? या कोई मजेदार संवाद याद आता हो तो लिख दीजिए। उदाहरण के लिए:

  • अमां ये कौन सी एयरलाइन्स है?
  • हैलो कंट्रोलरुम! हमारे सामने हनुमान एयरलाइन्स का बन्दा फिर से आकर खड़ा हो गया है, इसको अलग कॉरीडोर क्यों नही देते?
  • काश! हम भी इसकी तरह वन मैन एयरलाइन्स चला सकते?
  • अब बढेगा कम्पटीशन।
  • यार! ये हनुमान एयरकार्गो वाले इत्ता माल कैसे ढो लेते है?

कार्टून: मदर्स डे का अन्य पहलू

जैसा कि आप सभी को पता है कि अभी पिछले दिनो मदर्स डे मनाया गया। अब इस मदर्स डे की वजह से माताओं को कितनी परेशानियां उठानी पड़ती है, वो इस कार्टून को देखकर आप स्वयं ही अंदाजा लगाइए:

MothersdayHindi

इस शानदार कार्टून को बनाया है अमरीका मे रहने वाले हमारे एक मित्र महेन्द्र शाह ने। महेन्द्र शाह पेशे से आर्किटेक्ट है और लगभग तीस साल से अमरीका मे बसे हुए है। कार्टून बनाना इनका शौंक है। अब आप हर सप्ताह, महेन्द्र भाई के कार्टून, हिन्दी रुपांतर के साथ, अपने पसंदीदा ब्लॉग मेरा पन्ना पर देख सकते है।

GrooveMonitor या जी का जंजाल?

यदि आपने अपने कम्पयूटर पर माइक्रोसाफ़्ट ऑफिस 2007 को स्थापित किया होगा तो आपका पाला ग्रूव्स मॉनिटर (GrooveMonitor.exe) नामक बेकार के प्रोग्राम से जरुर पड़ा होगा। इस प्रोग्राम से माइक्रोसाफ़्ट की अक्षमता का एक और नमूना दिखाई देता है। कम्पयूटर के शुरु होते ही, ये प्रोग्राम मेमोरी मे लोड हो जाता है और जब भी आप राइट क्लिक या किसी फोल्डर पर क्लिक करते हो पहले ये प्रोग्राम रन होता है, फिर राइट क्लिक या फोल्डर खुलता है। कुल मिलाकर अगर आपके कम्प्यूटर पर सीमित मेमोरी है तो आप इस प्रोग्राम से १००% दु:खी हो जाओगे। ये प्रोग्राम आपके कम्पयूटर के मेमोरी की ऐसी तैसी करता रहता है।

समस्या यहीं तक सीमित नही रहती, यदि आप सोचते हो कि माइक्रोसाफ़्ट इनको हटाने के लिए कोई Uninstall प्रोग्राम प्रदान किया होगा तो आपका सोचना गलत है। ऊपर से तुर्रा ये कि आप अपने कम्पयूटर पर चाहे माइक्रोसाफ़्ट ऑफिस 2007 हटा भी तो ये GrooveMonitor अंगद के पैर की तरह जमा रहता है। और तो और, यदि आप रजिस्ट्री मे जाकर भी इस प्रोग्राम की सारी इंट्रीज उड़ा देते हो, फिर भी ये भूत की तरह वापस आ जाता है। कुल मिलाकर इस प्रोग्राम से कई लोग पीड़ित है। इस समस्या के सिलसिले में माइक्रोसाफ़्ट के सपोर्ट ग्रुप को देखने पर आपको पता चलेगा कि माइक्रोसाफ़्ट वाले कितना रुखा जवाब देते है।

समस्या निदान

अब जब समस्या है तो निदान भी होगा ही। वैसे तो यह निदान माइक्रोसाफ़्ट की तरफ़ से ( UnInstall के रुप मे ही ) आना चाहिए था, लेकिन समस्या का निदान एक दूसरे प्रोग्राम Autoruns की तरफ़ से आया है, अलबत्ता माइक्रोसाफ़्ट ने इस प्रोग्राम को सेफ़लिस्ट मे डाला हुआ है।

 autoruns

आटोरन को चलाकर आप GrooveMonitor वाले प्रोग्राम पर क्लिक करके डिलीट करते ही यह समस्या हमेशा के लिए गायब हो जाती है। यहाँ पर इस पोस्ट को लिखने का उद्देश्य हमारे जैसे बाकी साथियों के साथ इस समस्या और निदान को शेयर करना था। आशा है इस लेख से माइक्रोसाफ़्ट ऑफिस के बाकी प्रयोक्ताओं का भी भला होगा।

 

 

 

म्यूचल फंड : प्राथमिक जानकारी

मेरा यह लेख,  इंटरनैट पर उपलब्ध नयी हिन्दी व्यापार पत्रिका मोलतोल पर पूर्व प्रकाशित हो चुका है।

हमारे कई साथियों मे म्यूचल फंड के बारे मे जानने की इच्छा व्यक्त की है। लेकिन कई ऐसे मित्र भी है जो म्यूचल फंड के बारे मे विस्तार से जानना चाहते है। आइए इस बार बात करते है म्यूचल फंड की। लेकिन आगे बढने से पहले आपको जानना होगा कि शेयर, सरकारी प्रतिभूतिया बांड और म्यूचल फंड क्या होता है। Read the rest of this entry »

ये RSS क्या बला है? : भाग 2

सभी साथियों का शुक्रिया जिन्होने मेरे पिछले लेख को पसन्द किया। हमारे कई नए चिट्ठाकार साथियों ने RSS और फीड के बारे मे पूछा है। इस बारे मे मैने अपने एक पुराने लेख ये RSS क्या बला है? मे काफी कुछ बताया है। नए चिट्ठाकारों से निवेदन है कि इस उपरोक्त लेख को पढने के बाद यहाँ से आगे पढे।

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वैसे इसी मौके पर याद आया, १ मई को इन्टरनैट पर World RSS Awareness Day मनाया गया। इसलिए इस बारे मे आज (ये लेख १ मई को ही लिखा गया था) से अच्छा दिन नही हो सकता। इंटरनैट पर इस बारे मे कुछ अच्छे वीडियो दिखे, इसलिए सोचा आप लोगों से भी शेयर करता चलूं। जो वीडियो मुझे सबसे अच्छा लेखा वो आपके लिए पेश है:

यदि कोई ब्लॉग/साइट आपको अपना RSS फीड प्रदान करती है तो आप उस साइट पर लिखे जाने वाले नए लेखों की सूचना घर बैठे पा सकते है। इसके लिए आपको फीड रीडर्स की सेवा लेनी पड़ेगी जो कि फ्री मे उपलब्ध है। वैसे भी आजकल बढते ब्लॉग संख्या की वजह से ब्लॉग पढना काफी मुश्किल होता जा रहा है। एग्रीगेटर सिर्फ़ ब्लॉग की सूचना दे रहे है, आपको अपनी पसन्द के ब्लॉग खुद चुनने होंगे। इस कार्य के लिए फीडरीडर्स आपके काफी काम आएंगे। मै गूगल रीडर का प्रयोग करता हूँ। वैसे आप अपने कम्पयूटर के आपरेटिंग सिस्टम और अपनी सुविधा के अनुसार इतने सारे उपलब्ध फीड रीडर्स मे से कोई एक चुन सकते है। गूगल रीडर का सही उपयोग आज ज्ञानजी के ब्लॉग अथवा मेरे ब्लॉग के मेरी पसन्द वाले हिस्से मे देख सकते है।

इस लेख को आगे भी जारी रखेंगे, अगली बार बात करेंगे फीडबर्नर सेवा की।