Archive for 2010

जन्मदिन पर कुछ गपशप

अभी पिछले दिनो राहुल गाँधी की एक सभा मे चप्पल पहनने वालो को बाहर रोका गया था, काहे? अरे पता नही क्या? इन दिनो राजनेताओं पर जूते चप्पलों से हमला हो रहा है। सबसे पहले जार्जबुश, फिर जरदारी, ब्लेयर, उमर अब्दुल्ला, चिदम्बरम और ना जाने कौन कौन। आजकल तो अगर अपनी सभा को सुर्खियों मे [...]

मेरा पन्ना की छठवीं वर्षगांठ

इसी सप्ताह मेरा पन्ना को शुरु हुए ६ साल हो गए। इसका मतलब ये साल मेरा पन्ना अपनी छठवीं वर्षगाँठ मना रहा है। अगर दूसरे शब्दों मे कहा जाए तो छठी। मै अपने सभी पाठकों, साथी चिट्ठाकारों, परिवार के सदस्यों एवम अन्य मित्रो का धन्यवाद करना चाहता हूँ जिनकी प्रेरणा से आज मेरा पन्ना इस [...]

जीवन, काँच की बरनी और दो कप चाय

अभी कुछ दिन पहले एक पुराने मित्र का फोन आया, मुझसे हालचाल पूछा, मैने बोला यार बहुत व्यस्त हूँ, मित्र ने उस समय तो कुछ ज्यादा नही कहा, लेकिन थोड़ी देर मे ही उसने एक इमेल फारवर्ड की, जिसको मै आपके साथ शेयर कर रहा हूँ, इस इमेल को पढकर मुझे जीवन को समझने का [...]

एक प्रवासी का दर्द

आज रवीश का लेख “मै प्रवासी हूँ” पढकर फिर से एक प्रवासी होने के दर्द को महसूस किया। रवीश ने अच्छा लेख लिखा है जरुर देखिएगा। कई साल पहले मैने भी इस बारे मे कुछ लिखा था। प्रवासी एक सामाजिक प्रक्रिया है, इसे रोका नही जा सकता। देखा जाए तो दिल्ली भी प्रवासियों ने ही [...]

मदनू…..एक खूबसूरत गीत

कभी कभी कुछ गीत दिल को छू जाते है, ऐसा ही एक फिल्मी गीत है, आने वाली फिल्म लम्हा से। इस गीत के बोल इतने अच्छे है कि बार बार सुनने को जी करता है। इसे गाया भी उतनी खूबसूरती से गया है। इस गीत को गाया है चिन्मय और क्षितिज ने और संगीतबद्द किया [...]

भागादौड़ी वाली भारत यात्रा

आप सभी लोगो से काफी दिनो बहुत बाद मुखातिब हो रहा हूँ, क्या करुं मसरुफियत इस कदर बढ गयी है कि ब्लॉगिंग से लगभग दूर सा हो गया हूँ। फिर भी जैसे ही मौका मिलता है ब्लॉगिंग करने की कोशिश करता हूँ। अभी कल ही भारत यात्रा से लौटा हूँ, इस बार भी भारत यात्रा [...]

एक डाल पर मैना बोले

आज सुबह सुबह एक मैना से मुलाकात हो गयी। पेड़ की ऊँची डाल पर बैठी मैना काफी दु:खी दिख रही थी।हमसे रहा ना गया, हम भी मैना की तरफ़ लपक लिए।  हमने पूछा भई क्या हुआ,  क्यों मुंह लटकाये हो, कोई भैंस खोल ले गया क्या तुम्हारी? बस फिर क्या था, इत्ते दिनो से मन [...]

रीठेल : हमारी छुट्टी का विवरण

लीजिए पेश है, एक पुराने लेख का रीठेल, ये लेख 2006 मे लिखा गया था, तब से लेकर अब तक तीन साल बीत चुके है, लेकिन हफ़्ते की छुट्टी का तरीका नही बदला, इस लेख मे कंही कंही आपको स्वयं का चेहरा नजर आएगा, जहाँ भी नजर आए, टिप्पणी करने से चूकिएगा मत। तो लीजिए [...]

अक्सर ऐसा क्यों होता है जब…

अक्सर हमारे जीवन मे कुछ ऐसी बाते घटती है, कि हम सोचने पर मजबूर हो जाते है कि ऐसा क्यों होता है। लीजिए पेश है कुछ ऐसी घटनाएं। अक्सर ऐसा क्यों होता है जब… आपके हाथ ग्रीस या गुँथे आटे से सने होते है, तभी फोन की घंटी बजती है। अगर पेंच कसते समय, अगर [...]

दिल्ली वालों का लिटमस टेस्ट

क्या आप दिल्ली से है? यदि हाँ तो आइए जरा आपका लिटमस टेस्ट कर लेते है। हमारे पास एक झकास ’जुगाड़’ है जिससे हमे पता चल जाएगा कि आप कितने प्रतिशत दिल्ली के है। पहले एक डिस्क्लेमर : ये एक इमेल मे मुझको मिला था, मेरा इस पर कोई कॉपीराइट नही है। तो आइए हम [...]