मैं ख़याल हूं किसी और का, मुझे सोचता कोई और है
सर-ए-आईना मेरा अक्स है, पस-ए-आईना कोई और है
मैं किसी के दस्त-ए-तलब में हूं, तो किसी के हऱ्फ-ए-दुआ में हूं
मैं नसीब हूं किसी और का, मुझे मांगता कोई और है
कभी लौट आएं तो न पूछना, सिऱ्फ देखना बड़े गौ़र से
जिन्हें रास्ते में ख़बर हुई कि ये रास्ता कोेई और है
अजब ऐतबार-ब-ऐतबारी के दर्मियां है ज़िन्दगी
मैं करीब हूं किसी और के, मुझे जानता कोई और है
वही मुंसिफ़ों की रिवायतें, वही फ़ैसलों की इबारतें
मेरा जुर्म तो कोई और था, पर मेरी सज़ा कोई और है
तेरी रौशनी मेरी ख़ा ो-ख़ाल से मुख्त़लिफ़ तो नहीं मगर
तू क़रीब आ तुझे देख लूं, तू वही है या कोई और है
-सलीम कौसर
आप इन्हे भी पसंद करेंगे
- जून 30, 2005 -- मैं ख़याल हूं किसी और का,… (2)
- अप्रैल 13, 2008 -- भड़ासी ब्लॉगर की फरमाइशी गज़ल (7)
- अगस्त 29, 2007 -- साथ चलते आ रहे हैं …… (7)
- अक्तुबर 20, 2005 -- कैसी कैसी शायरी? (22)
- अगस्त 14, 2005 -- एक पाठक की भेजी गज़ल (3)
- जुलाई 26, 2005 -- उस ने रूख़ से हटा के बालों को (0)
- जुलाई 24, 2005 -- आप से गिला …. (1)
- जुलाई 22, 2005 -- शमा जलाए रखना … (1)
- जुलाई 20, 2005 -- आज फिर उन का सामना होगा (1)
- जुलाई 17, 2005 -- वो अंजुमन में… (1)
This entry was posted
on मंगलवार, जनवरी 4th, 2005 at 11:41 am and is filed under Uncategorized.
You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed.
You can leave a response, or trackback from your own site.
Author: Jitendra Chaudhary (508 Articles)

जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर, साफ़्टवेयर बनाते बनाते कब ब्लॉग लिखने लगे, पता ही नही चला। फिर कुछ शरारती तत्वों ने लेखन की तारीफ़ दी, अब झेलो, कानपुरी हूँ, इत्ती जल्दी तो नही रुकने वाला। इंटरनैट के लती। लेखन शैली में श्री के पी सक्सेना जी से प्रेरित। भारतीय राजनेताओ से खासी चिढ,वैसे भी तारीफ़ के लायक तो कोई काम किए नही ये लोग। भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित। इसी व्यथा का ही नतीजा है कि हम ब्लॉगिंग मे कूदे। आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है। अब देखते है कब तक हम इस खूंटे डेरे से बंधे रहते है।
सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने।
पसन्दः राजनीतिक चर्चा, बचपन की यादें।
नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना
मेरे बारे मे बाकी जानकारी इधर है:
मेरा पन्ना पर टिप्पणी करने वालों के लिए एक तोहफा। आप टिप्पणी करिए और अपने ब्लॉग का पता सही सही भरिए, हम आपके ब्लॉग की आखिरी पोस्ट का लिंक यहाँ दिखा देंगे। इससे आपके ब्लॉग को कुछ और पाठक मिलेंगे। है ना सही चीज? तो फिर देर किस बात की है, शुरु हो जाइए।