जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर, साफ़्टवेयर बनाते बनाते कब ब्लॉग लिखने लगे, पता ही नही चला। फिर कुछ शरारती तत्वों ने लेखन की तारीफ़ दी, अब झेलो, कानपुरी हूँ, इत्ती जल्दी तो नही रुकने वाला। इंटरनैट के लती। लेखन शैली में श्री के पी सक्सेना जी से प्रेरित। भारतीय राजनेताओ से खासी चिढ,भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित। आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है।
सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने।
पसन्दः राजनीतिक चर्चा, बचपन की यादें।
नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना
मेरे बारे मे बाकी जानकारी इधर है:
आपने ब्लाग तो लिख लिया, उसे कोई पढ नही रहा…इसी चिन्ता मे आपका लिखने का मूड नही बन रहा। तो जनाब हैरान परेशान ना होइये, कुछ ये वाली युक्तियाँ अपनाइये, फ़िर देखिये आपके ब्लाग द्वारे….भीड़ ही भीड़.
युक्तियाँ यहाँ पढिये।
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on गुरुवार, अक्तुबर 20th, 2005 at 9:00 am and is filed under विविध.
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2 Responses to “लोगों को ब्लाग तक कैसे खीच कर लायें”
sir ji , muje yeh bataiye ki ‘लोगों को ब्लाग तक कैसे खीच कर लायें’ ?
Regards : Captain
जरुरी सूचना
मेरा पन्ना पर टिप्पणी करने वालों के लिए एक तोहफा। आप टिप्पणी करिए और अपने ब्लॉग का पता सही सही भरिए, हम आपके ब्लॉग की आखिरी पोस्ट का लिंक यहाँ दिखा देंगे। इससे आपके ब्लॉग को कुछ और पाठक मिलेंगे। है ना सही चीज? तो फिर देर किस बात की है, शुरु हो जाइए।
Kya tukbandi sujhi hai:
Yeh Jugat lagaon ya woh jugat lagon
soch raha likhne waala
kalam ghis tu likhe chala chal
paa jayega padhne waala.
sir ji , muje yeh bataiye ki ‘लोगों को ब्लाग तक कैसे खीच कर लायें’ ?
Regards : Captain