फ़तवा,सुपारी और आगे की कहानी

अभी पिछले दिनो, डेनमार्क के कार्टून कान्ड पर उत्तर प्रदेश सरकार के एक मन्त्री याकूब कुरैशी ने जोश मे आकर बैठे बिठाये आफत मोल ली।इन जनाब मे डेनमार्क मे छपे कार्टून के बनाने वाले कार्टूनिस्ट की जान की सुपारी खुले आम दे दी, वो भी एक दो लाख मे नही पूरे पूरे इक्यावन करोड़ (51 Crores), ऊपर से तुर्रा ये कि मन्त्री महोदय बोले “कि मै पूरे होशो हवास में और अपने नेता मुलायम सिंह की सहमति से यह कह रहा हूँ।” यानि मन्त्री ने जो कहा सो कहा, खांमखां मे मुलायम को भी लपेटे मे ले लिया। याकूब कुरैशी तो बयानबाजी कर कर दिये, और सारे न्यूज चैनलों ने भी लाइव दिखा दिया, अब याकूब मुकर तो सकते नही थे (पहले नेता कह कर मुकर जाया करते थे, ताकि जनता भी खुश और जर्नलिस्ट भी कुछ नही उखाड़ सकते थे) अलबत्ता बस इतना मुकरे कि ये बयान हमारा अपना है, मुलायम जी से सलाह मशवरा नही किया गया। अब न्यूज चैनलो को मसाला मिल ही चुका था।सो जनाब बाकायदा बयान का एनालिसिस किया जाने लगा। क्या मन्त्री क्या संत्री, क्या वकील और क्या पनवाड़ी, सबकी जुबान पर बस एक ही बात। लोग पक्ष और विपक्ष मे तर्क वितर्क करने लगे। न्यूज चैनल वाले, ना जाने कहाँ कहाँ से लोग पकड़ कर ले आये और सबका बिठा बिठा कर एक एक शब्द की व्याख्या कराई गयी।सच ही है, हिन्दुस्तान मे लोगों के पास बहुत टाइम फालतू है।

मुलायम सरकार पेशोपेश मे थी, सभी लोग मन्त्री को मन्त्री मन्डल से हटाने की बात करने लगे।इधर विपक्ष और केन्द्र का दबाव भी जोरदार तरीके से सामने आ रहा था। मुलायम ने अमर सिंह से विचार विमर्श किया, अमर सिंह ने न्यूज टीवी के स्टूडियों मे जा जा कर मंत्री के बयान की निन्दा की (अब निन्दा करने से किसी का क्या उखड़ जाता है ये मै आज तक नही समझ सका) बोले मन्त्री जी के पास इतने पैसे ही नही है जो सुपारी का एडवान्स भी दे सकें।हमने भी अपने मिर्जा साहब को पकड़ा और उनसे राय ली, बकौल मिर्जा:

देखो मियां, ये सब वोट बैंक का चक्कर है। याकूब कुरैशी तो बस जोश मे आकर बोल गये। जब उनकी ही कोई हैसियत नही तो उनके बयान की क्या हैसियत। अलबत्ता हाशिये से फ़्रन्ट पेज पर आने की कवायद है ये। अब रही बात बयान की तो मियां तो ये रहा एनालिसिस :

  1. याकूब कुरैशी के पल्ले मे इत्ते पैसे नही है कि सुपारी का दस परसेन्ट भी बयाना कर सकें।
  2. डेनमार्क जाने का पासपोर्ट कौन जुगाड़ करेगा? केन्द्र सरकार देगी, तो वही फंसेगी ना, मुलायम काहे परेशान हो रहे हैं।
  3. दूसरा मान लो किसी ने एग्री करके, पासपोर्ट का जुगाड़ कर भी लिया, तो बन्दा डेनमार्क कैसे जायेगा? मुलायम तो भेजने से रहे।
  4. इत्ता बवाल होने के बाद, किसी भी दिन, डेनमार्क की सरकार, अपने दूतावास को नये वीजा इशू करने से मना कर देगी। बन्दा क्या बिना वीजा जायेगा?

मैने मिर्जा से पूछा, मान लो,डेनमार्क मे रहने वाले किसी बन्दे ने काम निबटा दिया तो, मिर्जा बोला, अव्वल तो वो बन्दा हिन्दी/उर्दू जानता नही होगा, दूसरे अगर उसने काम निबटाना ही होता तो डेनमार्क मे प्रदर्शन शान्तिपूर्ण तरीके से नही होते। ये तो हम ही लोग है जो खामंखा मे पिलते है, और दस दस कदम आगे बढकर बयानबाजी करते है।इसलिये मिंया खबरे पढो, और बस मौज करो।अब रही बात कुरैशी की, तो भैया, मामला ठन्डा होने तो दो, कुरैशी को उसकी पार्टी वाले ही अच्छी तरह से निबटेंगे।बैठे बिठाये पंगा लेने की सजा तो उसे मिलेगी ही।

आखिरी समाचार मिलने तक इस्लामिक देशों की संस्था ने इस तरह के फतवों को गलत ठहराया है और लोगों के शान्ति बनाये रखने की अपील की है।

आप इन्हे भी पसंद करेंगे

2 Responses to “फ़तवा,सुपारी और आगे की कहानी”

  1. भाई इस बारेमें सबके अपने अपने तर्क, कुतर्क और वितर्क जो भी मानो वो हैं. अपने तो यही मनते हैं कि यह सारा मामला हैं वोट बैंक का. मुसलमान भङकेगा तो वोट बैंक बनेगा और मुसलमानो को पता नही क्या हो गया हैं, भङकते ही नहीं! सारे जहां में आग लगी हैं और भारत के मुसलमान शान्त हैं. भङको भाई वरना एसे और भी बयान देते रहने पङेंगे. हम दे नहीं सकते तो मंत्री से दिलवा देंगे. ५१ क्या १०१ करोङ का चढावा चढा दे, आखीर कुर्सी तो कहीं अधिक किमती हैं.

  2. अपनी टिप्‍पणी तो पहले से ही पोस्‍ट के रूप में यहाँ है