लघु कथा: एक कातिल का आखिरी बयान

यह कहानी मेरी लिखी हुई नही है,अभी पिछले दिनो मैं टोस्टमास्टर्स की एक मीटिंग मे गया था वहाँ एक प्रतियोगी ने इसे बोला था। मुझे पसन्द आयी।मै कुछ बदलाव के साथ इसे आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। कहानी से सम्बंधित कोई भी कापीराइट मेरा नही है।

मीलार्ड, मेरा नाम सुनीता है। हाँ मै अपराधी हूँ, मैने अपराध किया है, कत्ल किया है, उस शख्स का,जिसको मै सबसे ज्यादा चाहती थी। यह जान बूझ कर किया गया कत्ल है और मुझॆ इसका कोई अफ़सोस नही। मेरे वकील ने कहा कि गलती मान लो, तो सजा कम हो जायेगी, लेकिन कौन कौन सी गलती स्वीकार करूं।जब मैने होंश सम्भाला अपने माता पिता को हमेशा लड़ते पाया। मेरे बाप का कहना था कि मै अपनी मां कि गलती की वजह से पैदा हुई क्योंकि उस दिन मां ‘वो वाली पिल्स’ खाना भूल गयी थी।लेकिन इसमे मेरा क्या कसूर? मुझे क्यों सजा मिली? मेरे बाप ने मुझे कभी भी प्यार नही किया,कभी नही पुचकारा।। प्यार की जगह मुझे मिली मार और सिर्फ़ मार। सरकारी वकील ने कहा कि यह क्रूरता से किया गया कत्ल है, लेकिन क्रूरता तो उन्होने देखी ही कहाँ है। मुझे मेरे बाप से बात बेबात कभी झापड़, तो कभी बैल्ट,कभी जूते और कभी ना जाने क्या क्या मिला, ये सब क्रूरता नही थी तो और क्या था। मेरे बाप का मेरे प्रति व्यवहार देखकर मेरी मां बीमार पड़ गयी और भगवान को प्यारी हो गयी।

मुझे पढाई के लिये हमेशा डांट पड़ती थी, मेरा बाप मेरी पढाई के खिलाफ था, और वो नही चाहता था कि मै स्कूल जाऊं, इसलिये स्कूल छोड़ने और लाने की जिम्मेदारी हमारे पड़ोसी अंकल सैम की थी, अंकल सैम, बहुत अच्छे इन्सान थे, लेकिन सिर्फ़ तब तक, जब तक उन्होने मेरे कोमल अंगो से छेड़छाड़ करना नही शुरु किया। उसके बाद उनमे और जानवर मे कोई खास फर्क नही दिखता था।मै जानती थी कि यदि मै यह बात अपने बाप को बताती तो वो विश्वास नही करता शायद मेरी पढाई ही बन्द कर दी जाती। इसीलिये मै चुप रही और सब सहती रही।

बाप की उपेक्षा के बावजूद मैने कालेज मे एडमीशन लिया।कालेज मे मेरी जिन्दगी मे अमित आया, अमित………मेरे सपनो का राजकुमार। बड़े घराने का लड़का लेकिन बहुत ही शालीन। उसने मुझे बड़े बड़े सपने दिखाये, साथ जीने मरने की कसमें खाई।हम शामें साथ साथ बिताने लगे, एक दिन हम डिस्को गये और अमित ने मुझे कोल्ड ड्रिंक पीने को दी।फिर मुझे कुछ नही याद कि क्या हुआ। सुबह मैने अपने आपको अमित के फ़्लैट मे पाया और मै अपना सबकुछ लुटा चुकी थी,उस इन्सान के हाथों जिस पर मुझे पूरा भरोसा था। अमित जा चुका था, सदा के लिये………… फिर कभी मैने उसे नही दिखा। बाद मे मुझे पता लगा कि मै तो एक शर्त थी,सिर्फ़ एक शर्त, जो अमित ने अपने दोस्तों के साथ लगाई थी। लेकिन इस संसार मे औरत एक वस्तु की तरह शर्त क्यों मानी जाती है?

जिन्दगी ने कई मोड़ लिये और मेरी जिन्दगी मे रवि आया। जिसके साथ मैने घर बसाया।अपने सपनों का घर, जिसमे सिर्फ़ मै और रवि थे। किसी तीसरे के लिये कोई जगह नही थी। लेकिन पता नही कैसे इस घर को नजर लग गयी। एक दिन मै अपने आफिस से अचानक जल्दी घर आ गयी तो मैने अपने बैडरूम मे रवि को मेरी बैस्ट फ़्रेन्ड के साथ हमबिस्तर पाया। उस जगह जहाँ मुझे होना चाहिये था। मेरी आंखो के सामने जैसे अन्धेरा सा छा गया, दिल मानो धड़कना ही भूल गया। इन दोनो ने मेरे विश्वास को चूर चूर कर दिया था, वो पति जिसे मै दुनिया मे सबसे ज्यादा चाहती थी, वो सहेली जिस पर मुझे पूरा पूरा भरोसा था,दोनो ने मुझे धोखा दिया। मेरे सुखी जीवन में आग लगा दी और मुझे कंही का नही छोड़ा। इसलिये मुझे जो क्रूरता अपने बाप से मिली थी वो मैने इन दोनो पर निकाल दी, मार डाला…..हाँ मार डाला मैने इन दोनो धोखेबाज इन्सानों को, क्योंकि इन दोनो को जीने का कोई हक नही था।

मुझे अपने किये पर कोई पछतावा नही है, और ना ही मै आपसे किसी रहम की भीख मांगती हूँ। लेकिन मै आप सभी से एक सवाल पूछती हूँ। मुझे क्रूर बनाया किसने? इस समाज ने। जज साहब, सभी मुझे अपराधी कहते है, लेकिन अंकल सैम ने मेरा यौन उत्पीड़न किया, क्या वो अपराधी नही था? अमित ने मेरी इज्जत लूटी, क्या वो अपराधी नही था? रवि और मेरी सहेली ने मुझे धोखा दिया, क्या उन्होने अपराध नही किया? लेकिन आपका कानून शायद…………मुझे ही अपराधी ठहराये। इसलिये मै आपसे निवेदन करती हूँ कि मुझे फांसी दे दी जाय, वैसे भी मै इस गन्दी दुनिया मे जीना नही चाहती।

4 Responses to “लघु कथा: एक कातिल का आखिरी बयान”

  1. उपन्यास कब लिख रहे हो?

  2. कहानी अच्छी है पर नयापन कुछ नही है. फिल्मी ज्यादा लगती है.

  3. कहीं तो भी सुनी हुई सी लग रही है, या हो सकता है कि पढी हुई हो।

    हम तो चेपने वाले थे कि – क्या जीतू भैय्या, पकी पकाई क्यों खिला रहे हो? मगर समय रहते ही, जीतू भैय्या का ही ये पन्ना याद आ गया- http://www.jitu.info/merapanna/?p=463

    फ़िर सोचा, “मेरा (ही) पन्ना” है, तो सब कुछ हो सकता है!!

  4. क्‍या मिंयाँ फिल्‍मी कहानी लिख मारी, पहले विजय की हीरो की बदनसीबी पड़ी फिर तुम्‍हारी हीरोईन की….