वरी बाबा साँई, तुम्हारा बिकवानी प्रोपर्टी डीलर के पास वो क्या कहते है स्वागत है नी। छा तो चवें (क्या कहा?), प्रोपर्टी लेना है? तो लो नी वरी, हमने कब मना किया है। किदर लेंगा प्रोपर्टी। दो दो प्रापर्टी है नी, टाप क्लास, वरी देखो नी।
दुनिया मे हर चीज बिकती है, बस तुम्हारे जैसा खरीददार चाहिए। अब ड्राक्यूला के महल को ही ले, वो महल जो दशकों से भय का पर्याय रहा है, अब बिकाऊ है। यानि कि अब आप रोमानिया मे बने, ड्राक्यूला के महल को खरीद सकते है, कीमत? अरे ज्यादा नही भाई, यही कोई ४० मिलियन पौंड क्या कहा कन्वर्ट करके बताएं, अमां खरीदना आपने है या हमने? हमे लेना एक, ना देना दो, हम काहे कन्वर्ट करें आप खुद ही कर लो ना। और हाँ अगर ड्राक्यूला की आत्मा से आपकी मुलाकात हो तो उसको बताना जरुर, कि अब अकेला वही ड्राक्यूला नही है, ड्राक्यूला के मामले मे हिन्दुस्तान भी स्वावलम्बी हो गया है। अब हमारे यहाँ भी एक से बढकर एक ड्राक्यूला पैदा हो गए है, जो उससे भी खतरनाक है।
क्या कहा? ड्राक्यूला का महल पसन्द नही आया? चलो कोई बात नही, आप एक देश खरीद सकते है, देश? हाँ भाई हाँ। बिकवानी प्रापर्टीज मे देश भी बिकता है नी। बोलो लेगा? एक देश बिकाऊ है, पूरा का पूरा। सच्ची। लेकिन ये देश है बहुत छोटा, देश का नाम है सीलैंड। सीलैंड ५५० स्कवायर मीटर के प्लैटफार्म पर खड़ा एक किला है जो स्टील के दो मजबूत खम्भों के सहारे, समुन्दर के बीचो बीच खड़ा है। इस देश की अपनी वैबसाइट भी है और अपनी मुद्रा भी। अब यह देश बिकाऊ है, ज्यादा जानकारी यहाँ देखिए। तो भई हमने आपको दो दो प्रापर्टी की जानकारी दे दी, हमारा कमीशन देना मत भूलिएगा।
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on मंगलवार, जनवरी 9th, 2007 at 10:54 am and is filed under Uncategorized.
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Author: Jitendra Chaudhary (507 Articles)

जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर, साफ़्टवेयर बनाते बनाते कब ब्लॉग लिखने लगे, पता ही नही चला। फिर कुछ शरारती तत्वों ने लेखन की तारीफ़ दी, अब झेलो, कानपुरी हूँ, इत्ती जल्दी तो नही रुकने वाला। इंटरनैट के लती। लेखन शैली में श्री के पी सक्सेना जी से प्रेरित। भारतीय राजनेताओ से खासी चिढ,वैसे भी तारीफ़ के लायक तो कोई काम किए नही ये लोग। भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित। इसी व्यथा का ही नतीजा है कि हम ब्लॉगिंग मे कूदे। आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है। अब देखते है कब तक हम इस खूंटे डेरे से बंधे रहते है।
सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने।
पसन्दः राजनीतिक चर्चा, बचपन की यादें।
नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना
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ये गरीब चीजें छोडो… मन्ने तो कुवैत में इंटरेस्ट है.. बोलो बेचोगे?