एक अनमोल उपहार
Author: jitu9968 (498 Articles)
जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर, साफ़्टवेयर बनाते बनाते कब ब्लॉग लिखने लगे, पता ही नही चला। फिर कुछ शरारती तत्वों ने लेखन की तारीफ़ दी, अब झेलो, कानपुरी हूँ, इत्ती जल्दी तो नही रुकने वाला। इंटरनैट के लती। लेखन शैली में श्री के पी सक्सेना जी से प्रेरित। भारतीय राजनेताओ से खासी चिढ,भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित। आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है। सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने। पसन्दः राजनीतिक चर्चा, बचपन की यादें। नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना मेरे बारे मे बाकी जानकारी इधर है:
हमारा हिन्दी चिट्ठाकारों का परिवार सचमुच एक भरे पूरे परिवार की तरह है। ब्लॉग लिखते लिखते हम कब एक दूसरे को अपने घर का सदस्य बनाते चले जाते है पता ही नही चलता। ऐसा ही हुआ कुछ हमारे साथ। हमारी एक चिट्ठा जगत की नवोदित चिट्ठाकारा ने हमे एक बहुत प्यारी कविता भेजी है। पहले आप कविता पढिए, कवियत्री का नाम और अवसर के बारे मे कविता के आखिरी मे बताया जाएगा।
बङी उलझन थी कि आज के मुबारक दिन आपको क्या उपहार दूं,
उपहार जो सबसे अलग प्यार भरा अनमोल हो,
फ़िर सोचा क्यॊं ना ये उपहार, सबसे हटकर..
प्यार बधाई और दुआओं भरे चंद बोल हों..
मुबारक हो आपको दिन ये सुहाना,
दुआ है मेरी ए दिन! तुम बार बार आना,
और याद दिलाना उस पल की..
जब दो आत्मायें एक हुईं थी,
और वादे किये गये गये थे…
संग जीने-मरने और साथ निभाने के उमर भर,
साथ ये कभी छुटे ना और ये जन्मों का ये बंधन कभी टूटे ना,
आपकी ज़िंदगी यूं ही खुशीयों और उमंगो भरी हो..
मांग में सदा चांद-सितारे और हाथों में मेंहदी सजी हो..।
- ‘ मान्या‘
मान्या जी, मेरी और मेरी पत्नी की तरफ़ से आपको बहुत बहुत धन्यवाद। हमारी शादी की तेहरवी वर्षगाँठ पर इससे खूबसूरत तोहफा और कोई हो ही नही सकता। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।














































Jitu bhai kya date hai
Wish for many happy returns of the day.
Many Many congrats to you that you sustained for 13 years
Sachin Johri
TAMPA FLORIDA – USA
घुघूती बासूती
ghughutibasuti.blogspot.com
मान्या…बहुत सुंदर कविता
मुझे भी?
जी हाँ संयोग से आज हमारी भी विवाह की वर्षगाँठ है, मुझे संकोच हो रहा था यह बताने में और मैने भुवनेश जी को मना भी किया था कि किसी को ना बतायें पर जब आपके विवाह की वर्षगाँठ के बारे में जाना तो संकोच दूर किया और यहाँ लिख दिया है।
क्या बात है ताऊ “13″ साल भी गुजर ही गया.. हा हा हा… वाह! नारायण नारायण
मान्याजी को धन्यवाद
हमे पहले पता होता तो हम भी कविता -सविता भेज देते. दोनो ही पड़ोस में रहती है.
आपको और बेगम साहिबा को शादी की सालगिरह मुबारक हो. बहुत-बहुत शुभकामनाएं .
भाई सागर जी,
आपको और सेठानी जी को भी विवाह की वर्षगांठ पर अपरिमित शुभकामनाएं .
और साथ में बधाई मान्या जी को इस प्यारी सी कविता के लिए।