हाय! हम कोरिया मे क्यों ना हुए?

ए ल्लो, आप भी पूछोगे, कि सवेरे सबेरे हमे क्या हुआ। अरे यार बात ही कुछ ऐसी है। कोरिया की एक बैंक अपने कर्मचारियों को कम्पनी खर्च पर डेटिंग पर भेज रहा है। यकीन नही आता ना, तो भैया पढ लो खुद ही।


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चित्र साभार : नाइजीरिया प्लानेट डाट काम

बैंक का यह मानना है कि (कुंवारी महिला) कर्मचारी रोमांस के बाद खुशमिजाज रहेंगी और ढंग से काम करेंगी। (ह्म्म, रोमांस के बाद महिलाएं तो खुश रहती है,ये पक्का हो गया) । लेकिन भैया ये बताया जाए, कि यह प्रस्ताव कुवैत मे कब लागू करेंगे? हमारे बुढापे से पहले लागू करवाओ ना। काश! हम भी कोरिया मे ही कंही काम कर रहे होते, तो इस समय यह ब्लॉग नही लिखते, कंही पार्क मे बैठकर किसी महिला के साथ डेटिंग कर रहे होते। खैर, अब का हो सकता है, ये तो कुवैत आने से पहले सोचना चाहिए था ना।

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Author: Jitendra Chaudhary (507 Articles)

जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर, साफ़्टवेयर बनाते बनाते कब ब्लॉग लिखने लगे, पता ही नही चला। फिर कुछ शरारती तत्वों ने लेखन की तारीफ़ दी, अब झेलो, कानपुरी हूँ, इत्ती जल्दी तो नही रुकने वाला। इंटरनैट के लती। लेखन शैली में श्री के पी सक्सेना जी से प्रेरित। भारतीय राजनेताओ से खासी चिढ,वैसे भी तारीफ़ के लायक तो कोई काम किए नही ये लोग। भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित। इसी व्यथा का ही नतीजा है कि हम ब्लॉगिंग मे कूदे। आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है। अब देखते है कब तक हम इस खूंटे डेरे से बंधे रहते है। सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने। पसन्दः राजनीतिक चर्चा, बचपन की यादें। नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना मेरे बारे मे बाकी जानकारी इधर है:

11 Responses to “हाय! हम कोरिया मे क्यों ना हुए?”

  1. अब पछताए का होगा… :(

    हमे भी पहले भनक लग जाती तो बोरीया, बिस्तर ले कर कोरीया में नौकरी करने पहूँच जाते.

    जाने तो यह सब बेकार के लफड़े है, क्योंकि अँगुर खट्टे है. :)

  2. सब्र करो जितेन्द्र जी सब के दिन फिरते हैं ,कोरिया के उस बैंक की रह पर दुनिया के सभी बैंक चलें आमीन

  3. धीरज धरो जीतू जी ,दुर्दिन किसके नहीं फिरे

  4. जीतू भैया, हमका नौकरी चाहिहै तो सिर्फ़ कोरिया मा, कौनो लिंक का जुगाड़ है का उहां

  5. अब इस उमर में ऐसी खबरें मती बताया कीजिये.सच्ची में दिल में गम बैठ जाता हैगा. अब क्या बताएं जीतू प्यारे कि हीरा जनम अमोल मिला था हमको और ई सब हिंदुस्तानी घसड़म में कौड़ी बदले चला गया बिना किसी डेटिंग-शेटिंग के. अब तो बस यही तमन्ना मन में किलोलें करे है जी कि अगला जनम कोरिया-शोरिया में हो भले ही हाइट ससुरी चार फ़ुट की हो .

  6. भारत में भी इस रिवाज़ का चलन तो किया था, विप्रो कम्पनी ने। अब कानपुर वाले कहाँ मानते, तो साहब कानपुर के ही एक वकील साहब ने, यहाँ की ही एक महिला की तरफ से विप्रो प्रमुख प्रेमजी पर मुकदमा ही ठोंक दिया। अब कोई आगे भी आया तो यहाँ भी विरोध।

    http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/552085.cms
    http://www.rediff.com/money/2006/nov/23wipro.htm

  7. राकेश खंडेलवाल on मार्च 8th, 2007 at 7:58 pm

    अभी अभी यह खबर मिली है, ब्रांच खुलेगी इक कुवैत में
    लेकिन एक समस्या होगी,एम्पलायी बुरका पहनेंगे
    चिलमन के पीछे से डेटिंग का अन्दाज आप अब सीखें
    खुद-ब-खुद डेटिंग के किस्से और नये फिर कुछ बन लेंगें

  8. जीतू जी, ये खबर सिर्फ़ महिला कर्मचारियों के लिये है ? अगर हां तो आप लोग इतने खुश क्यों हो रहे हैं.. :) और आपकी श्रीमती जी आपका blog पढती है ना.. ? आगे आप लोग खुद सोच लीजिये..

  9. यार अब यह तो हद हो गई!! मैं तो पहले ही 3 साल से कोरिया में न होने का गम मना रहा था, अब आपने एक बात और बता दी गम मनाने के लिए!! :(

  10. भाभी जी कहां हैं ? जरा उनसे बात करनी है। :-)

  11. भाभी जी कहां हैं, जरा उनसे बात करनी है :-)

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