हाय! हम कोरिया मे क्यों ना हुए?
Author: jitu9968 (498 Articles)
जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर, साफ़्टवेयर बनाते बनाते कब ब्लॉग लिखने लगे, पता ही नही चला। फिर कुछ शरारती तत्वों ने लेखन की तारीफ़ दी, अब झेलो, कानपुरी हूँ, इत्ती जल्दी तो नही रुकने वाला। इंटरनैट के लती। लेखन शैली में श्री के पी सक्सेना जी से प्रेरित। भारतीय राजनेताओ से खासी चिढ,भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित। आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है। सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने। पसन्दः राजनीतिक चर्चा, बचपन की यादें। नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना मेरे बारे मे बाकी जानकारी इधर है:
ए ल्लो, आप भी पूछोगे, कि सवेरे सबेरे हमे क्या हुआ। अरे यार बात ही कुछ ऐसी है। कोरिया की एक बैंक अपने कर्मचारियों को कम्पनी खर्च पर डेटिंग पर भेज रहा है। यकीन नही आता ना, तो भैया पढ लो खुद ही।

चित्र साभार : नाइजीरिया प्लानेट डाट काम
बैंक का यह मानना है कि (कुंवारी महिला) कर्मचारी रोमांस के बाद खुशमिजाज रहेंगी और ढंग से काम करेंगी। (ह्म्म, रोमांस के बाद महिलाएं तो खुश रहती है,ये पक्का हो गया) । लेकिन भैया ये बताया जाए, कि यह प्रस्ताव कुवैत मे कब लागू करेंगे? हमारे बुढापे से पहले लागू करवाओ ना। काश! हम भी कोरिया मे ही कंही काम कर रहे होते, तो इस समय यह ब्लॉग नही लिखते, कंही पार्क मे बैठकर किसी महिला के साथ डेटिंग कर रहे होते। खैर, अब का हो सकता है, ये तो कुवैत आने से पहले सोचना चाहिए था ना।














































हमे भी पहले भनक लग जाती तो बोरीया, बिस्तर ले कर कोरीया में नौकरी करने पहूँच जाते.
जाने तो यह सब बेकार के लफड़े है, क्योंकि अँगुर खट्टे है.
http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/552085.cms
http://www.rediff.com/money/2006/nov/23wipro.htm
लेकिन एक समस्या होगी,एम्पलायी बुरका पहनेंगे
चिलमन के पीछे से डेटिंग का अन्दाज आप अब सीखें
खुद-ब-खुद डेटिंग के किस्से और नये फिर कुछ बन लेंगें