कभी आपने सोचा है कि आपने नामाराशी कितने लोग है आपके शहर में, या आपके प्रदेश मे, या आपके देश मे या फिर पूरी दुनिया में। है ना मजेदार विचार। लेकिन भई ऐसे लोगों को कैसे ढूंढे। है तो बहुत बड़ी उलझन। लेकिन जनाब आपकी इस उलझन को सुलझाया है एक साइट पीप्ल डाट काम ने । इसमे आप दुनिया के किसी भी शहर/देश मे रहने वाले बन्दों के बारे मे जान सकते है, बशर्ते वो डाटा पब्लिक डोमेन मे हो, मतलब कि सार्वजनिक हो। अक्सर होता है जी, टेलीफोन डायरेक्टरी का मसाला, याहू पीपल का प्रोफ़ाइल और भी बहुत कुछ। तो शुरु करिए और ढूंढिए अपने बिछड़े लोगों को।

लेकिन भई सवाल ये उठता है कि ये सब तो आप गूगल मे भी ढूंढ सकते है। जवाब है नही जी, आप ट्राई करके देखिए, फर्क साफ़ दिख जाएगा। इस्तेमाल तो कई हो सकते है जैसे पुराना दोस्त, पुराना प्यार, बिछड़े रिश्तेदार (कौन ढूंढता है?) या पुराने कर्मचारी या फिर और भी कोई। मै तो इसमे अपने पुराने ब्लॉगर्स, हिन्दी चिट्ठाकारी से नदारद लोगों को ढूंढने की कोशिश करता हूँ, तो पहला नाम डालते है “Atul Arora” का । क्या कहा? अरे यार गायब लोगों को ही तो ढूंढेंगे है ना?
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on शनिवार, अप्रैल 14th, 2007 at 2:43 pm and is filed under Uncategorized.
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Author: Jitendra Chaudhary (507 Articles)

जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर, साफ़्टवेयर बनाते बनाते कब ब्लॉग लिखने लगे, पता ही नही चला। फिर कुछ शरारती तत्वों ने लेखन की तारीफ़ दी, अब झेलो, कानपुरी हूँ, इत्ती जल्दी तो नही रुकने वाला। इंटरनैट के लती। लेखन शैली में श्री के पी सक्सेना जी से प्रेरित। भारतीय राजनेताओ से खासी चिढ,वैसे भी तारीफ़ के लायक तो कोई काम किए नही ये लोग। भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित। इसी व्यथा का ही नतीजा है कि हम ब्लॉगिंग मे कूदे। आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है। अब देखते है कब तक हम इस खूंटे डेरे से बंधे रहते है।
सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने।
पसन्दः राजनीतिक चर्चा, बचपन की यादें।
नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना
मेरे बारे मे बाकी जानकारी इधर है:
मेरा पन्ना पर टिप्पणी करने वालों के लिए एक तोहफा। आप टिप्पणी करिए और अपने ब्लॉग का पता सही सही भरिए, हम आपके ब्लॉग की आखिरी पोस्ट का लिंक यहाँ दिखा देंगे। इससे आपके ब्लॉग को कुछ और पाठक मिलेंगे। है ना सही चीज? तो फिर देर किस बात की है, शुरु हो जाइए।
ये बात तो खूब कही
मैने अपना नाम ढुंढा तो मै भूल गया था वो जानकारी मिल गई, बोलो!!
शानदार.
छिपने की कोशिश बेकार कर दी!!