आज कल ब्लॉग सामग्री की चोरिया बहुत बढ गयी है। ऐसे चोरों के इरादे नापाक होते है जैसे आपके द्वारा लिखे गए लेखों से अपनी साइट को सजाना और विज्ञापन आय या अन्य प्रकार की आय को अकेले हजम कर जाना। कई लेखक अपने लेखों के प्रति बेफिक्र रहते है कि इस तरह की चोरी को कभी भी गम्भीरता से नही लेते। इनकी यही शिथिलिता ही कई नयी चोरियों को अप्रत्यक्ष रुप से प्रोत्साहित करती है। ध्यान रखिए, आपका कंटेन्ट आपकी सम्पत्ति है, आप यदि इसकी देखभाल नही करेंगे तो और कौन करेगा? अपने दरवाजे खिड़कियां खुली रखेंगे, तो चोरो को निमंत्रण ही मिलेगा ना। आप यदि अपने घर पर ताला नही लगाएंगे तो चोर आपके मोहल्ले को आरामगाह की तरह ही प्रयोग करेंगे और फिर आपके पड़ोसियों के यहाँ भी चोरिया होना आम बात हो जाएगी। आप कहेंगे मेरे घर मे है ही क्या जो चोर चुरा लेगा, बिल्कुल है जी, आपका लिखा, जिससे दर्जनों वैबसाइटे भरी जा सकती है और बैठे बिठाए विज्ञापन तथा अन्य प्रकार ही आय कमाई जा सकती है।
ये तो बस शुरुवाती रुझान है, जल्द ही कंटेन्ट से ढेर सारे पैसे कमाए जा सकेंगे। कुछ समझदार लोगों को ये समझ मे आने भी लगा है और वे जुगाड़ भिड़ा भी रहे है। जब इसी कंटेन्ट से कोई दूसरा पैसे कमाने लगेगा तो इन्ही लेखकों को अपनी गलती का एहसास हो जाएगा। लेकिन तब तक जुगाड़ी लोग इनके लेखों को अपने नाम के साथ अमर कर चुके होंगे और साथ ही ढेरों कमाई भी अपनी जेब के हवाले कर चुके होंगे।
लेकिन जनाब इस चोरी को रोका कैसे जाए, मैने इस विषय पर एक पोस्ट ब्लॉग सामग्री चोरी होने पर क्या करें? लिखी थी उसे भी देखिएगा। इसके अलावा इन्टरनैट पर कुछ बहुत अच्छे लेख पढने को मिले है, ये रहे उनके लिंक
क्या करें जब कोई आपके लेख चोरी कर ले,
इस चोरियों से अपने लेख कैसे बचाएं।
आपके फीड से चोरी को कैसे पकड़े।
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on गुरुवार, नवम्बर 15th, 2007 at 2:23 pm and is filed under Uncategorized.
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Author: Jitendra Chaudhary (508 Articles)

जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर, साफ़्टवेयर बनाते बनाते कब ब्लॉग लिखने लगे, पता ही नही चला। फिर कुछ शरारती तत्वों ने लेखन की तारीफ़ दी, अब झेलो, कानपुरी हूँ, इत्ती जल्दी तो नही रुकने वाला। इंटरनैट के लती। लेखन शैली में श्री के पी सक्सेना जी से प्रेरित। भारतीय राजनेताओ से खासी चिढ,वैसे भी तारीफ़ के लायक तो कोई काम किए नही ये लोग। भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित। इसी व्यथा का ही नतीजा है कि हम ब्लॉगिंग मे कूदे। आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है। अब देखते है कब तक हम इस खूंटे डेरे से बंधे रहते है।
सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने।
पसन्दः राजनीतिक चर्चा, बचपन की यादें।
नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना
मेरे बारे मे बाकी जानकारी इधर है:
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