अरे, इ देवगौड़ा तो फिर फैल गया रे…

अरे सुकुल सुने हो…
इ देवगौड़ा तो फिर फिसल गया, अब बोलता है हम समर्थन ना देंगे। हमको तो उसी दिन शक हो गया था जिस दिन देवगौड़ा शपथ समारोह मे नही आया। हम तो आडवानी को उसी दिन बोले थे कि ये देखो ये पंगेबाज (अपना वाला नही, कर्नाटक वाला) आज नही आया, कंही ये बन्दा फिर फड्डा ना करे। जब हमने पूछा कि भाई ये काहे नही आया तो सबने इशारे इशारे मे मोदी की तरफ़ इशारा किया।इशारे इशारे मे समझाया है कि ये गुज्जू भाई आएं है ना इसलिए इधर वाले धरतीपुत्र अनुपस्थित है। लेकिन आज तो इसने फिर पलटकर कमाल कर दिया।

अब कर्नाटक वाले ऐसे नेता को कैसे झेलेंगे? और बीजेपी का क्या जिसकी किस्मत मे दक्षिण का दरवाजा खुलना ही नही लिखा। बहुत नाइन्साफ़ी है ये। हमने मिर्जा को ढूंढा और उनसे पूछा तो मिर्जा बोले :

अमां यार! ये देवगौड़ा एंड फैमिली बहुत बड़े एक्टर है। ये लोग इत्ता नाटक करते है कि क्या बताएं। पहले नही देखे, जब बेटे ने बीजेपी के साथ जाने का मन बनाया था तो पिताजी ने कैसे कैसे ड्रामे किए थे। अब समर्थन ना देने के फैसले का मतलब तो बहुत साफ़ है। सारा मामला खाने पीने का है। ज्यादा माल वाले मंत्रालय उसके हवाले कर दो, सारे घपलों पर आंखे बन्द करके चुप करके बैठे रहो, फिर देखो, अभी दौड़ते हुए पलटी मारेगा। लेकिन इत्ते बड़े नेता (पूर्व प्रधानमंत्री) को ये सब शोभा नही देता है। अब बीजेपी के सामने एक ही रास्ता है कि जनता के बीच जाए और उनको जेडीएस के बारे खुलकर बताए। अब हमारे हिसाब से तो कभी भी जेडीएस सत्ता मे नही आएगी। कांग्रेस के पास अच्छा मौका है अब, जेडीएस के विधायकों के पाला बदली कराने का।

अब हम तो बस चुपचाप तमाशा ही देखेंगे क्योंकि पता नही ये देवगौड़ा फिर से पलटी ना मार दे…….
आप क्या कहते हो इस पर?

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5 Responses to “अरे, इ देवगौड़ा तो फिर फैल गया रे…”

  1. हम तो कहते हैं, चुनाव करवाओ.

  2. देवेगौडा तो का है, ई मनई थाली का बैंगन है….शुकुल जी से पूछिए तो वो भी मिर्जापुरी लोटा के बारे में बताएँगे…बिना पेंदी का लोटा होता है, मिर्जापुरी….ई देवेगौडा वही है…

    इनको सेकुलर होने की साप्ताहिक बीमारी से ग्रसित है ई…समर्थन लेने की बात बीजेपी को तभी करनी चाहिए, जब ई आदमी ‘सेकुलर बुखार’ से ग्रसित न हो.

  3. देवगौड़ा को देख कर यह लगता है कि प्रधानमंत्री बनने को किसी काबलियत की जरूरत नहीं।

  4. …. और इसी वजह से हम इन्हें देव घौड़ा नहीं देव गधेड़ा (गधा) कह कर बुलाते हैं। ..:)

  5. …. और इसी वजह से हम इन्हें देव घौड़ा नहीं देव गधेड़ा (गधा) कह कर बुलाते हैं।
    🙂