अगर आज के युग मे हनुमान जी होते तो हवा मे कुछ ऐसे हंगामे होते:
नोट: पाठकों के लिए कुछ मजेदार खेल, इस कार्टून को देखकर आपके मन मे कुछ विचार आते है? या इस कार्टून का कोई शीर्षक नजर आता है? या कोई मजेदार संवाद याद आता हो तो लिख दीजिए। उदाहरण के लिए:
- अमां ये कौन सी एयरलाइन्स है?
- हैलो कंट्रोलरुम! हमारे सामने हनुमान एयरलाइन्स का बन्दा फिर से आकर खड़ा हो गया है, इसको अलग कॉरीडोर क्यों नही देते?
- काश! हम भी इसकी तरह वन मैन एयरलाइन्स चला सकते?
- अब बढेगा कम्पटीशन।
- यार! ये हनुमान एयरकार्गो वाले इत्ता माल कैसे ढो लेते है?
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on शुक्रवार, मई 16th, 2008 at 1:20 pm and is filed under विविध.
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Author: Jitendra Chaudhary (507 Articles)

जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर, साफ़्टवेयर बनाते बनाते कब ब्लॉग लिखने लगे, पता ही नही चला। फिर कुछ शरारती तत्वों ने लेखन की तारीफ़ दी, अब झेलो, कानपुरी हूँ, इत्ती जल्दी तो नही रुकने वाला। इंटरनैट के लती। लेखन शैली में श्री के पी सक्सेना जी से प्रेरित। भारतीय राजनेताओ से खासी चिढ,वैसे भी तारीफ़ के लायक तो कोई काम किए नही ये लोग। भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित। इसी व्यथा का ही नतीजा है कि हम ब्लॉगिंग मे कूदे। आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है। अब देखते है कब तक हम इस खूंटे डेरे से बंधे रहते है।
सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने।
पसन्दः राजनीतिक चर्चा, बचपन की यादें।
नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना
मेरे बारे मे बाकी जानकारी इधर है:
मेरा पन्ना पर टिप्पणी करने वालों के लिए एक तोहफा। आप टिप्पणी करिए और अपने ब्लॉग का पता सही सही भरिए, हम आपके ब्लॉग की आखिरी पोस्ट का लिंक यहाँ दिखा देंगे। इससे आपके ब्लॉग को कुछ और पाठक मिलेंगे। है ना सही चीज? तो फिर देर किस बात की है, शुरु हो जाइए।
न पैकिंग की जरुरत, न नये मकान ढ़ूंढ़्ने की जहमत.
आराम से घर पर सोऐं और रातों रात पूरा मकान ही शिफ्ट करायें.
-संपर्क करें: “जीतू-प्रो.हनुमान एयर कार्गो”
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Manu
Digital Infosys