मेरा पन्ना के चार साल पूरे
मुझे सभी पाठकों को बताते हुए, बेहद खुशी हो रही है कि आपके चहेते ब्लॉग मेरा पन्ना ने इसी सप्ताह चार साल पूरे किए है। आप सभी पाठकों का जो प्यार, प्रोत्साहन, सहयोग, सलाह और आलोचना मिली है, उससे इस ब्लॉग को बेहतर बनाने मे बहुत मदद मिली है। आशा है आने वाले वर्षों मे भी आप लोगों का यही सहयोग मुझे लिखने की प्रेरणा देता रहेगा।

ग्राफिक सौजन्य से :टीम तरकश
वैसे तो मेरे हिन्दी ब्लॉगिंग का सफर 31 अगस्त 2004 को शुरु हुआ था, लेकिन वो ब्लॉग रोमन मे था, (जिस प्लेटफार्म पर लिखा था, अब वो ही नही रहा) । हिन्दी लेखन 3 सितम्बर 2004 को लिखना चालू हुआ था, जिसको शायद 5/6 सितम्बर को प्रकाशित किया गया था। अब ये देर क्यों हुई, ये मत पूछिएगा। सोचा था कुछ कठिन हिन्दी के शब्द लिखेंगे, लेकिन जिस टूल से लिखते थे, उसमे काफी दिक्कते आयी। उस समय ना तो कोई सहायता करने वाला था, ना ही कोई चिट्ठाकार फोरम। इसलिए किसी तरह पोस्ट पूरी की और दो दिन बाद छाप दी। लेकिन इस परेशानी से ये जरुर हुआ कि आने वाले नए ब्लॉगरों की सहायता के लिए कमर कस ली और उन्हे ब्लॉग बनाने, हिन्दी लिखने मे भरपूर सहायता प्रदान करने का प्रयत्न किया। उसके बाद हिन्दी ब्लॉगिंग जो कुछ हुआ, वो आप सभी लोगों को पता है, यदि नही पता तो मेरे लेखों के लेखागार मे से हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास लेख श्रॄंखला पढिए।
कुछ गणित भी हो जाए: मेरा पन्ना पर लगभग 950 से ज्यादा लेख लिखे गए है, इसमे कुछ अधूरे लेख भी शामिल है, जिनको प्रकाशित नही किया जा सका। आज मेरा पन्ना पर लगभग 400 से 500 विजिटर प्रतिदिन आते है। आज सुबह के हिट काउंटर के अनुसार अब तक मेरा पन्ना पर कुल मिलाकर 2,18,415 लोग आ चुके है। आने वाले पाठकों मे ज्यादातर गूगल भारत के सर्च इंजन से आते है। पाठकों की अधिकतर पसन्द मेरे किस्सागोई जैसे मोहल्ला पुराण, मिर्जा साहब वाले लेख है। लेकिन मेरे तकनीकी ज्ञान को भी पाठक बखूबी झेल लेते है। अलबत्ता कुछ अलग तरह के पाठक मेरे अर्थव्यव्स्था और शेयर बाजार सम्बंधी लेख भी पसन्द करते है। आप किस तरह के लेख पसन्द करते है, मुझे बताना मत भूलिएगा। आते रहिए और पढते रहिए आपका अपना पसन्दीदा ब्लॉग मेरा पन्ना ।




















































बहुत सुन चुका हूँ आपके बारे में और आज पहली बार आपका ब्लॉग पढ़ रहा हूँ।
देर से आने के लिए क्षमा चाहता हूँ।
इतने सारे अच्छे चिट्ठे छप रहें हैं आजकल।
सभी को पढ़ने के लिए समय नहीं मिलता।
और हम जैसे लोग केवल पढ़ने से सन्तुष्ट नहीं होते।
टिप्पणी किए बिना नहीं रह सकते।
चार साल पूरे होने पर हार्दिक बधाई।
लिखते रहिए और हम आज से आपके चिट्ठे पढ़ते रहेंगे।
शुभकामनाएं
गोपालकृष्ण विश्वनाथ
जे पी नगर, बेंगळूरु
(एक अहिन्दी भाषी हिन्दी प्रेमी)
jo aapke blog ko nazrayae
uski fute dono akho
Regards
आप इसी तरह हर साल हंसी-खुशी से जन्मदिन मनाते रहें और हम दूर से ही केक की सुगंध लेकर खुशी से टिपियाते रहें
Haapy 4th birthday.
लगे रहो मेरे भाई
ek recap likhe
आप नियमित लिखते रहे हैँ – ४ थी साल गिरह पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ
- लावण्या
मुझे आज भी याद है कि आप ने किस तरह मेरी ऊगली पकड कर इस चिट्ठालोक में मेरा स्वागत किया था एवं रास्ता दिखाया था!!
सस्नेह
– शास्त्री जे सी फिलिप
– हिन्दी चिट्ठाकारी के विकास के लिये जरूरी है कि हम सब अपनी टिप्पणियों से एक दूसरे को प्रोत्साहित करें
हिंदी ब्लॉगों की बढ़ती संख्या और लोकप्रियता को देख कर हमारे जैसे तमाम हिंदीप्रेमियों को ख़ुशी होती है, लेकिन आप उन लोगों में से हैं जिन्हें इस प्रगति पर खुशी के साथ-साथ गर्व भी होता होगा. हिंदी ब्लॉगिंग के शुरुआती काल में आपकी सक्रियता वैसे ही बेहद संक्रामक थी. लेकिन इसके अलावा भी बहुतों को आपने आगे बढ़ कर हौसला बढ़ाया. कई बेमतलब के विवादों को शांत कराने और सुचारू व्यवस्था बनाए रखने में भी आपकी(अनूप जी के साथ) प्रमुख भूमिका रही. अनेकों नव-ब्लॉगरों ने आपसे तकनीकी सहायता पाई है.
निरंतर लिखते रहें. जन्मदिन की शुभकामनाएँ!
हिंदी ब्लॉगों की बढ़ती संख्या और लोकप्रियता को देख कर हमारे जैसे तमाम हिंदीप्रे