GrooveMonitor या जी का जंजाल?

यदि आपने अपने कम्पयूटर पर माइक्रोसाफ़्ट ऑफिस 2007 को स्थापित किया होगा तो आपका पाला ग्रूव्स मॉनिटर (GrooveMonitor.exe) नामक बेकार के प्रोग्राम से जरुर पड़ा होगा। इस प्रोग्राम से माइक्रोसाफ़्ट की अक्षमता का एक और नमूना दिखाई देता है। कम्पयूटर के शुरु होते ही, ये प्रोग्राम मेमोरी मे लोड हो जाता है और जब भी आप राइट क्लिक या किसी फोल्डर पर क्लिक करते हो पहले ये प्रोग्राम रन होता है, फिर राइट क्लिक या फोल्डर खुलता है। कुल मिलाकर अगर आपके कम्प्यूटर पर सीमित मेमोरी है तो आप इस प्रोग्राम से १००% दु:खी हो जाओगे। ये प्रोग्राम आपके कम्पयूटर के मेमोरी की ऐसी तैसी करता रहता है।

समस्या यहीं तक सीमित नही रहती, यदि आप सोचते हो कि माइक्रोसाफ़्ट इनको हटाने के लिए कोई Uninstall प्रोग्राम प्रदान किया होगा तो आपका सोचना गलत है। ऊपर से तुर्रा ये कि आप अपने कम्पयूटर पर चाहे माइक्रोसाफ़्ट ऑफिस 2007 हटा भी तो ये GrooveMonitor अंगद के पैर की तरह जमा रहता है। और तो और, यदि आप रजिस्ट्री मे जाकर भी इस प्रोग्राम की सारी इंट्रीज उड़ा देते हो, फिर भी ये भूत की तरह वापस आ जाता है। कुल मिलाकर इस प्रोग्राम से कई लोग पीड़ित है। इस समस्या के सिलसिले में माइक्रोसाफ़्ट के सपोर्ट ग्रुप को देखने पर आपको पता चलेगा कि माइक्रोसाफ़्ट वाले कितना रुखा जवाब देते है।

समस्या निदान

अब जब समस्या है तो निदान भी होगा ही। वैसे तो यह निदान माइक्रोसाफ़्ट की तरफ़ से ( UnInstall के रुप मे ही ) आना चाहिए था, लेकिन समस्या का निदान एक दूसरे प्रोग्राम Autoruns की तरफ़ से आया है, अलबत्ता माइक्रोसाफ़्ट ने इस प्रोग्राम को सेफ़लिस्ट मे डाला हुआ है।

 autoruns

आटोरन को चलाकर आप GrooveMonitor वाले प्रोग्राम पर क्लिक करके डिलीट करते ही यह समस्या हमेशा के लिए गायब हो जाती है। यहाँ पर इस पोस्ट को लिखने का उद्देश्य हमारे जैसे बाकी साथियों के साथ इस समस्या और निदान को शेयर करना था। आशा है इस लेख से माइक्रोसाफ़्ट ऑफिस के बाकी प्रयोक्ताओं का भी भला होगा।

 

 

 

म्यूचल फंड : प्राथमिक जानकारी

मेरा यह लेख,  इंटरनैट पर उपलब्ध नयी हिन्दी व्यापार पत्रिका मोलतोल पर पूर्व प्रकाशित हो चुका है।

हमारे कई साथियों मे म्यूचल फंड के बारे मे जानने की इच्छा व्यक्त की है। लेकिन कई ऐसे मित्र भी है जो म्यूचल फंड के बारे मे विस्तार से जानना चाहते है। आइए इस बार बात करते है म्यूचल फंड की। लेकिन आगे बढने से पहले आपको जानना होगा कि शेयर, सरकारी प्रतिभूतिया बांड और म्यूचल फंड क्या होता है। Read the rest of this entry »

ये RSS क्या बला है? : भाग 2

सभी साथियों का शुक्रिया जिन्होने मेरे पिछले लेख को पसन्द किया। हमारे कई नए चिट्ठाकार साथियों ने RSS और फीड के बारे मे पूछा है। इस बारे मे मैने अपने एक पुराने लेख ये RSS क्या बला है? मे काफी कुछ बताया है। नए चिट्ठाकारों से निवेदन है कि इस उपरोक्त लेख को पढने के बाद यहाँ से आगे पढे।

rssImage

वैसे इसी मौके पर याद आया, १ मई को इन्टरनैट पर World RSS Awareness Day मनाया गया। इसलिए इस बारे मे आज (ये लेख १ मई को ही लिखा गया था) से अच्छा दिन नही हो सकता। इंटरनैट पर इस बारे मे कुछ अच्छे वीडियो दिखे, इसलिए सोचा आप लोगों से भी शेयर करता चलूं। जो वीडियो मुझे सबसे अच्छा लेखा वो आपके लिए पेश है:

यदि कोई ब्लॉग/साइट आपको अपना RSS फीड प्रदान करती है तो आप उस साइट पर लिखे जाने वाले नए लेखों की सूचना घर बैठे पा सकते है। इसके लिए आपको फीड रीडर्स की सेवा लेनी पड़ेगी जो कि फ्री मे उपलब्ध है। वैसे भी आजकल बढते ब्लॉग संख्या की वजह से ब्लॉग पढना काफी मुश्किल होता जा रहा है। एग्रीगेटर सिर्फ़ ब्लॉग की सूचना दे रहे है, आपको अपनी पसन्द के ब्लॉग खुद चुनने होंगे। इस कार्य के लिए फीडरीडर्स आपके काफी काम आएंगे। मै गूगल रीडर का प्रयोग करता हूँ। वैसे आप अपने कम्पयूटर के आपरेटिंग सिस्टम और अपनी सुविधा के अनुसार इतने सारे उपलब्ध फीड रीडर्स मे से कोई एक चुन सकते है। गूगल रीडर का सही उपयोग आज ज्ञानजी के ब्लॉग अथवा मेरे ब्लॉग के मेरी पसन्द वाले हिस्से मे देख सकते है।

इस लेख को आगे भी जारी रखेंगे, अगली बार बात करेंगे फीडबर्नर सेवा की।

हिन्दी ब्लॉगर प्रश्नावली

बहुत दिनो से सोच रहा था कि हिन्दी चिट्ठाकारो (ब्लॉगरो) से सम्बंधित प्रश्नावली बनायी जाए जिसमे सारी आशाएं, कुंठाए, उत्सुकताए, जिज्ञासाएं, निराशाए और समस्याएं शामिल हो। तो जनाब लीजिए पेश है, हिन्दी चिट्ठाकारों की प्रश्नावली, और हाँ इसमे हिन्दी ब्लॉग्स के पाठक भी भाग ले सकते है, और भाग ले क्यों भी ना, वे भी तो भावी चिट्ठाकार है। इसलिए पढिए, अपने आपको नम्बर दीजिए और मस्त रहिए:

नियमावली

  1. सभी प्रश्न पढने जरुरी है।
  2. बिना पढे (समीर भाई, ध्यान दें), जवाब देने पर, अपने स्कोर के लिए आप स्वयं ही उत्तरदायी होंगे।
  3. सभी प्रश्नो के जवाब देने जरुरी है।
  4. इस प्रश्नावली को पढने के बाद, इस पोस्ट पर टिप्पणी अति आवश्यक है, अन्यथा आपका पढा मान्य नही होगा (और लेखक की आह! भी लेंगे)  यहाँ पर बता दें कि लेखक की याद्दाश्त काफी अच्छी है और टिप्पणी का बोझ उतारने मे वे सबसे आगे रहते है।
  5. अपना स्कोर जानने के लिए अपने जवाब को सीरियल नम्बर को 10 से गुणा कर दें और कुल योग मे जोड़ ले।
  6. वैसे ये सब मौज मस्ती के लिए लिखा गया है, लेकिन इसमे आपको कोई गम्भीरता नजर आती है तो लेखक जिम्मेदार नही है।

क्या आपका अपना हिन्दी ब्लॉग है?

  1. नही।
  2. है।
  3. उत्सुक हूँ, बनाने की सोच रहा/रही हूँ।
  4. आप लोगो का हश्र देखकर, डरता/डरती हूँ।

आप रोजाना कितने हिन्दी ब्लॉग पढते है?

  1. एक या दो ।
  2. पाँच से दस तक (यही अपनी टोली के लोगों के ब्लॉग पर)
  3. दस से बीस तक (सबको टिप्पणी जो देनी होती है।)
  4. बीस से ज्यादा (एग्रीगेटर वालों ने ड्यूटी लगाई है, इसलिए सभी पर क्लिक करके लौट आते है।)

आपकी ब्लॉगिंग की प्रेरणा किससे मिली?

  1. उसी बन्दे को तो ढूंढ रहा हूँ, हमे फंसाकर खुद निकल गया।
  2. आप ही तो है, रोगी बनाके रख दिया है, बाहर मिलो तो निबटते है।
  3. खुद से, हम किसी से प्रेरणा नही लेते।
  4. प्रेरणा तो बजाज के साथ भाग गयी…….

आप हफ़्ते मे कितनी पोस्ट लिखते है?

  1. एक या दो ( ज्यादा लिखने से अहमियत घटती है/सच्चाई तो ये है कि विषय ही नही मिलते)
  2. सात पोस्ट (हर रोज लिखते है, खुजली है)
  3. सात से पंद्रह (लिखना क्या है, कापी पेस्ट करते है।)
  4. पंद्रह से ज्यादा (हम लिखते थोड़े ही है, न्यूज साइट के RSS फीड से पोस्ट कराते है।)

आप ब्लॉगिंग क्यों करते है?

  1. लोगो तक अपनी कविताएं पहुँचाने के लिए (सामने बिठाकर कवितापाठ करते थे तो बन्दा ऊँघने लगता था, इसलिए ये रास्ता चुना)
  2. सुना है ब्लॉगिंग करने से लोग बुद्दिजीवी बन जाते है,इसलिए ट्राई मारा। वैसे भी क्यों ना करें, लिखना हमारा जन्मसिद्द अधिकार है
  3. मजबूरी है (इत्ती रचनाएं, संपादकों ने वापस लौटाई है, कहाँ खपाएं?)
  4. इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए फिलहाल ब्लॉगिंग बन्द की है।

आप अपने ब्लॉग पर क्या लिखना पसंद करते है?

  1. लिखना क्या है जी, सुबह गुसलखाने मे बैठकर जो पहला विचार आता है उस पर लिख देते है।
  2. अपने मन की भड़ास (कल धोबी ने पैंट ठीक से नही धोई थी, इसलिए ब्लॉग पर मैने उसको धोया। आज बीबी/पति ने सब्जी जला दी है…..)
  3. कुछ भी, जो मन आया (कौन सा साहित्य पुरस्कार मिलने वाला है)
  4. गाली गलौच, विवादास्पद और उकसाने वाले लेख (आपको पता नही? यही हिट है आजकल)

आप अपने ब्लॉग पर कितने बड़े लेख लिखते है?

  1. बहुत छोटे (एक लाइना…..टाइम बचता है।)
  2. एक पैराग्राफ़ वाले (अब जानकारी/सामग्री जितनी होगी, उससे बड़े लेख कैसे लिख सकते है? )
  3. ठीक ठाक ( तीन पैरा से ज्यादा नही, ताकि पाठक पढे,समझे और टिप्पणी भी करे)
  4. क्लिष्ट अथवा लम्बे लम्बे लेख (क्योंकि एक बार मे ही अगर समझ लिया तो पाठक दोबारा काहे आएगा)

आप दिन भर मे कितनी टिप्पणियां करते है?

  1. पाँच से कम (अब जित्ते लोग हमे देंगे उत्ती ही तो वापस करेंगे)
  2. पाँच से दस टिप्पणियां (प्रेम व्यवहार बनाके रखना पड़ता है, कभी तो लोग उधार चुकाएंगे)
  3. दस से बीस (आटोमेटिक मशीन लगा रखी है, कॉपी पेस्ट की)
  4. बीस से ज्यादा ( ये वाला काम आउटसोर्स कर दिया है।)

हिन्दी चिट्ठाकारों के आपसी विवादो पर आपका क्या सोचना है?

  1. सब टीआरपी का खेल है बाबा
  2. सभी आत्मनिर्भर है (आपस मे नही लड़ेंगे तो कोई और लड़ने आएगा?)
  3. लड़ने से लिखने की प्रेरणा मिलती है।
  4. यहाँ यही सब तो करने आए है।

आपके ब्लॉग पर की गयी टिप्पणी आपको कितनी अच्छी लगती है।

  1. हम टिप्पणी के लिए नही लिखते।
  2. बिना टिप्पणी लिखने मे मजा नही आता।
  3. टिप्पणी प्रेमी/प्रेमिका की तरह है, जब भी दीदार हो, अच्छा लगता है।
  4. नए ब्लॉगर की टिप्पणी हमेशा, आशा बंधाती है (पुराने गए तो क्या हुआ, एक नया ग्राहक और बढा)

आप ब्लॉगिंग से कितनी कमाई कर लेते है।

  1. कमाई (अच्छा! सम्भव है क्या? )
  2. कुछ भी नही….. (हम यहाँ कमाने थोड़े ही आए है..)
  3. पाँच सौ रुपए मासिक
  4. दुखती रग पर हाथ रख दिया आपने

उम्मीद है आपकी कुछ जिज्ञासाएं शान्त हुई होंगी। यदि आपके दिमाग मे कोई और सवाल और उसके मस्त  से 4 जवाब है तो टिप्पणी द्वारा प्रेषित करिएगा, हम उसे भी शामिल करने की कोशिश करेंगे। अब आप शुरु हो जाइए, अपने आपको स्कोर दीजिए, हमे अपना स्कोर बताना मत भूलिएगा। पढते रहिए, आप सभी का पसंदीदा ब्लॉग मेरा पन्ना

पुनश्च : वैसे तो हमारा मानना है कि ब्लॉगर एक अलग ही टाइप की श्रेणी होती है, ना पुरुष ना स्त्री । फिर भी आलोक भाई के हड़काने पर इस लेख को सर्ववादी रुप दिया जा रहा है। आलोक भाई, अब तो टिप्पणी करिए।

ये सीआरआर(CRR) क्या बला है?

यदि आप बिजिनैस न्यूज चैनल देखते होंगे या व्यापार सम्बंधित खबरे पढते होंगे तो आपने अक्सर सीआरआर (CRR) का जिक्र सुना होगा। क्या आप जानते है सीआरआर क्या बला है? चलिए आज कुछ इसी बारे मे बात कर लेते है। आगे बढने से पहले थोड़ा महंगाई (Inflation) का भी जिक्र करना बहुत जरुरी होगा।

महंगाई क्या है? इसकी घट बढ को कैसे मापा जाता है?

महंगाई दरअसल जरुरी चीजों की कीमतो मे होने वाली बढोत्तरी है। उदाहरण के लिए गेहूँ की कीमते, पिछली खरीदारी मे यदि 10 किलो गेहूँ आप 100 रुपए मे लाते थे और वही गेहूँ आज 110 रुपए मे मिल रहा है तो इसका मतलब है कि महंगाई 10 रुपए अथवा 10% बढ गयी है। अच्छा ये तो रही गेंहूँ की कीमत, लेकिन सरकार इसको कैसे मापती है? अरे भई सरकार ने ढेर सारी जरुरी चीजों के खुदरा मूल्यों के लिए विभिन्न सूचकांक तय कर रखे है, यदि इन सूचकांको मे बढोत्तरी होती है तो इसका मतलब है कि महंगाई बढ रही है। इन सूचकांको मे मुख्यत: उपभोक्ता सूचकांक (Consumer Price Index- CPI), रहन सहन सूचकांक (Cost of Living Index-COLI), उत्पादक सूचकांक(Producer Price Index - PPI) तथा कुछ अन्य भी होते है। महंगाई बढने के कई कारण होते है, फसल का ठीक ना होना, सरकार द्वारा मूल्य नियंत्रित ना कर पाना, कुछ सरकारी नीतियों मे गलतियां, आयात-निर्यात नीति, वस्तुओं की मांग और आपूर्ति और मुद्रा की अधिक उपलब्धता (Excess Liquidity)  का होना।

बाकी सभी चीजे तो समझ मे आ गयी लेकिन  ये मुद्रा की उपलब्धता का क्या मतलब हुआ?

अब जैसा कि आपको पता है बाजार मे मुद्रा का आवागमन उसकी मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है। अब जो वित्तीय संस्थान (जैसे बैंक) होते है उनका काम ही होता है लोगो से जमाराशिया लेना और उसे दूसरे जरुरतमंद लोगो को देना। और इन कार्यों से लाभ कमाना। उदाहरण के लिए यदि किसी बैंक के पास ढेर सारी जमाराशि है, तो वह चाहेगा कि इस जमाराशि को बाजार मे ऋण देकर और उस पर अधिक से अधिक ब्याज कमाए। अब जितना ज्यादा पैसा बाजार मे आएगा उतना ही महंगाई बढेगी (वैसे ये हमेशा जरुरी नही), उदाहरण के लिए यदि एक फ़्लैट आपको २० लाख का मिल रहा है, और उसके लिए आपको 85% ऋण भी सस्ती ब्याजदरों पर मिल रहा है तो आप उसे लेना पसंद करेंगे, हो सकता है, अगले साल लेने का प्लान हो, लेकिन इसी साल लेना पसंद करेंगे। बैंको की ब्याज दरें भी मुद्रा की तरलता पर निर्भर करती है और हाँ एक और जरुरी चीज इसमे शामिल होती है वो है सीआरआर

अब ये सीआरआर क्या बला है?

वही तो बता रहा हूँ यार! आइए पहले इसकी परिभाषा जान लेते है:

Cash reserve Ratio (CRR) is the amount of funds that the banks have to keep with RBI. If RBI decides to increase the percent of this, the available amount with the banks comes down. RBI is using this method (increase of CRR rate), to drain out the excessive money from the banks

अब क्या है कि भारत मे जितने भी बैंक है वो रिजर्व बैंक के अधीन काम करते है। एक तरह से रिजर्व बैक इन सभी की अघोषित गारंटी लेता है। अब रिजर्व बैंक किसी भी बैंक की गारंटी कितनी लेता है यह निर्भर करता है कि उस बैंक ने रिजर्व बैंक के पास कितना पैसा/प्रतिभूतिया/स्वर्ण जमा कर रखा है। अमूमन हर बैंक को रिजर्व बैंक की सीआरआर नीति के अनुसार ही पैसा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। रिजर्व बैंक का काम यह सुनिश्चित करना होता है कि बाजार मे मुद्रा(रुपए) की जरुरत के मुताबिक ही तरलता(उपलब्धता) रहे, इसको कम या ज्यादा करने के लिए रिजर्व बैंक अपनी CRR के प्रतिशत मे घट-बढ करता रहता है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि रिजर्व बैंक ने अपनी CRR मे आधे प्रतिशत की बढोत्तरी कर दी, तो सभी बैंको को अपनी सीमा से आधा प्रतिशत और पैसा रिजर्व बैंक के पास जमा कराना पड़ेगा, नतीजतन बैंक के पास फंड कम हो जाएंगे, जब फंड कम पडेंगे तो मजबूरन वे अपनी उधारी देने की ब्याज दरें बढाएंगे, ताकि ऋण की मांग मे कमी आए। ब्याजदरें बढेंगी तो लोग उधार कम लेंगे। उधार कम लेंगे तो चीजों की मांग मे कमी आएगी। मांग मे कमी आएगी तो महंगाई मे कमी आएगी। देखने मे तो ये एक लम्बा प्रोसेस दिखता है, लेकिन अक्सर कारगर होता है। इस तरह से सरकार के लिए महंगाई घटाने का यह एक उपाय है।

लेकिन CRR बढने से आम आदमी और शेयर बाजार इससे कैसे प्रभावित होता है?

लाख टके का सवाल है। इस सवाल का जवाब निर्भर करता है कि आम-आदमी है क्या चीज।

  • यदि आप उत्पादक है तो समझिए की आपके माल की मांग मे कमी आने वाली है। आप नुकसान मे रहेंगे।
  • यदि आप उपभोक्ता है तो समझिए चीजों के दामों मे कुछ तो कमी आने वाली है। आप फायदे मे है।
  • यदि आपने किसी बैंक से परिवर्तनशील(Variable) ब्याज दरों पर ऋण ले रखा है, समझिए आप पर ब्याज का बोझ बढने वाला है। यदि आपने ऋण स्थायी(Fixed) दरों पर लिया है तो चादर तान कर सो जाइए, शामत बैंक की आएगी, आपकी नही। इसी स्थिति से बचने के लिए बैंक आपको परिवर्तनशील ब्याज दरों पर ऋण ठेलने की कोशिश करते है, समझे लाला?
  • यदि आप निवेशक है और आपने शेयर बाजार मे निवेश किया है तो सतर्क हो जाइए, बाजार मे मुद्रा तरलता की समस्या (Liquidity Crunch) आने वाली है।बाजार मे इस गतिविधि के कारण कुछ उतार चढाव आ सकते है। यदि आपने प्रतिभूतियों(Debt Instruments) वगैरहा मे निवेश किया है, आपको ज्यादा ब्याज मिलेगा, मजे करिए।
  • कुछ उद्योगों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकते है, नतीजतन उनके शेयरों मे भी गिरावट आ सकती है।

इस तरह से प्रत्येक व्यक्ति इस CRR के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रुप से प्रभावित जरुर होता है। आशा है आपकी CRR और महंगाई सम्बंधित जानकारी मे कुछ बढोत्तरी जरुर हुई होगी। इस सम्बंध मे यदि आपके जेहन मे कोई और सवाल है, अथवा आप इस बारे मे ज्यादा जानना चाहते है तो टिप्पणी के माध्यम से मुझसे सम्पर्क करें। ये लेख आपको कैसा लगा बताना मत भूलिएगा।

सम्बंधित कडियां:

आईपीएल: जमने लगा है रंग

जैसा कि आपको पता ही है, बीसीसीसीआई का सर्कस (हाँ जी, कई लोग इसे इसी नाम से पुकारते है) यानि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) T20 टूर्नामेंट पूरे तामझाम और धूमधाम से शुरु हो चुका है। डीएलएफ़ और ढेर सारे अन्य प्रायोजक द्वारा प्रायोजित इस टूर्नामेंट मे लाखो करोड़ो के दाँव लगे है। व्यापरियों से लेकर फिल्मस्टार अपना माल इसमे लगाए हुए है। पूरे क्रिकेट की प्रतिष्ठा दाँव पर लगी हुई है। खैर ये सब तो आप बाकी जगह पढ ही चुके हो, इसको बताकर आपका टाइम खोटी नही करने का। हम तो यह बताना चाहते है, कि लाख पंगो और विरोधों के बाद, आईपीएल का रंग चढने लगा है। 45 दिन तक चलने वाले इस महाकुंभ मेले मे आठ टीमे आमने सामने है। भले ही उदघाटन मैच थोड़ा फीका रहा हो, लेकिन अब बाकी के मैचों मे लोगो का उत्साह देखने लायक है। अभी तो शुरुवात है बाबू, अभी तो सभी टीमे अपना अपना रुतबा और बढाएंगी, टीवी, रेडियो, पत्रिकाओं वगैरहा मे कवरेज बढेगी। सभी टीमे अपना अपना वीडियो लाएंगी और ढेर सारे प्रमोशनल प्रोडक्ट्स भी। कुल मिलाकर जब तक पूरा भारत  आईपीएल के रंग मे नही रंगा जाएगा, तब तक खर्चा थोड़े ही निकलेगा है कि नही? ढेर  सारी कंट्रोवर्सी भी होगी, अब कित्ती होगी कह नही सकते, यूरोप और अमरीका की प्रीमियर लीग तो ढेर सारे लटके झटके होते है। Read the rest of this entry »

वर्डप्रेस 2.5 मे टिप्पणियों का संपादन

अभी कुछ दिन पहले किसी मित्र ने वर्डप्रेस के नए संस्करण मे टिप्पणियों के संपादन की समस्या के बारे मे पूछा था। क्योंकि टिप्पणियों के संपादन के लिए अलग से कोई बटन नही दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि नया वर्डप्रेस का एडमिन स्थल ज्यादा साफ़सुथरा दिखे। दरअसल वर्डप्रेस मे टिप्पणियों के संपादन का तरीका बहुत ही आसान है। आप टिप्पणियों के प्रबंधन मे जाइए, जहाँ आपको सभी टिप्पणियां दिखेंगी, वहाँ पर आप टिप्पणीकर्ता के नाम पर क्लिक करिए, तो आपको टिप्पणी संपादन के लिए खुल जाएगी, जहाँ पर मनमर्जी से टिप्पणी संपादन कर सकते है। ज्यादा जानकारी के लिए नीचे वाला चित्र देखिए: Read the rest of this entry »

खुला खत अविनाश के नाम

अपने मोहल्ला के अविनाश बाबू सुर्खियों और विवादों मे रहने का कोई मौका नही चूकते। अभी पिछले दिनो जनसत्ता वाला मसला हुआ इनके साथ, लीजिए एक और फ़ड्डा कर दिया इन्होने। इन्होने एक ब्लॉग बनाया था, बेटियों का ब्लॉग, अब चूंकि हम भी बेटियों वाले है, इसलिए हमने भी इसमे यथासम्भव योगदान करने का प्रयास किया। आज अविनाश बाबू की एक इमेल (संपादकों की टाइप की) आयी है, लीजिए आपके समर्थ पेश है: Read the rest of this entry »

यदि ऐसे लक्षण है तो समझो आपको प्यार हो गया है..

साथियों,

मेरी पिछली प्यार मोहब्बत वगैरहा वाली पोस्टो पर काफी हिट्स आए है। शायद लोगों को इन लेखों मे काफी मजा आ रहा है। चलिए जैसे पाठक अच्छा समझे। पाठकों के रुझान को देखते हुए, पेश है एक छोटी से पोस्ट। नौजवान लोग अक्सर अपने आप से सवाल पूछते है, क्या मुझे "उस से " प्यार हो गया है। ये सारे रुझान तो लड़कों की तरफ़ से है, थोड़े बहुत बदलाव के बाद ये लड़कियों पर भी लागू हो सकते है। कोई महिला ब्लॉगर सहायता करें, तो इसको, [प्यार को नही, इस लिस्ट को यार!] आगे बढाया जा सकता है। तो इन बच्चों की उलझन दूर करने के लिए पेश है, प्यार होने के कुछ लक्षण…

यकीन मानिए आपको प्यार हो गया है यदि….

  1. अचानक आपका संगीत का टेस्ट बदल गया हो, विरह गीत से आप सीधे सीधे डुएट पर उतर आए हो।
  2. आपको माँ के हाथ की बनी रोटियों मे भी उसका चेहरा नज़र आता हो।
  3. रात करवटें बदल बदल कर कटती हो।
  4. सारा दिन उसके ख्यालों मे बीतता हो।
  5. जब घर वाले कहने लगे, आप ऊंचा सुनने लगे हो।
  6. जब आप उसके घर पर बार बार फोन करके काटने मे पारंगत हो चुके हो।
  7. मोबाइल का बिल दस गुना बढ गया हो।
  8. आप इंटरनैट पर प्यार मोहब्बत वाले एसएमएस ढूंढने लगे हो।
  9. बॉस की डॉट का भी बुरा नही लगता हो।
  10. घर से कंही भी जाने के रास्ते महबूब की गली से होकर गुजरते हो।
  11. जब जिंदगी बहुत खूबसूरत लगने लगे।
  12. बार बार आईना देखने का मन करता हो….
  13. टीवी पर आने वाले हर प्रोग्राम मे नायिका का चेहरे मे आप अपने प्रियतमा का ही चेहरा नज़र आता हो।
  14. उर्दू समझ मे ना आने के बावजूद, गज़लें बहुत पसन्द आने लगी हो।
  15. आप बार बार ये सोचने लगे, कि ये पहले क्यों नही मिली (अगर बाद मे खुदा ना खास्ता शादी हो गयी, तो भी वैसा ही सोचोगे, बस "नही " शब्द हट जाएगा।)
  16. जब पाँच बजे का मिलने का वक्त तय हो, तो आप 1 बजे ही मिलन घटनास्थल पर पाए जाएं।
  17. घर से आप पूरा होमवर्क (स्क्रिप्ट,स्टाइल, शेरो शायरी याद करना) करके चले हो, लेकिन उसके सामने बोलती बंद हो जाए।
  18. जब आप उसके नाम के पहले अक्षर की अंगुठियों के डिजाइन देखना/पसंद करना शुरु कर दें।
  19. बार बार कल्पना करने लगते हो, कि काश! इस दुनिया मे सिर्फ़ वो और आप हो….बाकी कोई नही।
  20. माशूका के घरवाले आपके लिए कभी ईश्वर तो कभी, यमदूत की तरह दिखने लगते हो।
  21. गणित के सवाल हल करते समय, अक्सर शून्य मे उसका चेहरा दिखने पर, अटक जाते हो।
  22. जब उसके नाम और अपने नाम मे आप समानता ढूंढने लगते हो।
  23. उसके धर्मस्थलों पर आपके विजिट बढ जाते हो।
  24. जब आप चैट वाले साफ़्टवेयर मे नया आईडी( जो सिर्फ़ उसको पता हो) बनाकर लागिन करते हो। और घंटो उसका इंतजार करते हो।
  25. दिन मे सैकड़ों बार उसके नाम को गूगल करते हो।
  26. किसी और का फोन मिलाते मिलाते, उसका मोबाइल मिला दें।
  27. आपके बिजनैस प्रेजेन्टेशन मे उसका नाम बेसाख्ता जुबान पर आ जाए।
  28. उसने नाम या शक्ल मिलने वाली हिरोइनों की सारी फिल्मों की डीवीडी (भले ही आर्ट मूवी हो) आप खरीद लाएं।
  29. उसकी पसंद के रंग के कपड़े आपको पसंद आने लगे।
  30. अपनी पसंद को नज़रअंदाज करके, आप उसकी पसंदीदा ब्रांड/बैंड/फूल/किताब/फिल्म/नाटक/गीत/संगीत पर अपने पैसे फूंकने लगे हो।
  31. अक्सर उसका जिक्र आने पर आपका चेहरा गुलाबी हो जाए।
  32. जहाँ जहाँ उसका आना-जाना हो, उन जगहों पर आप अक्सर अपना डेरा जमाने लगे।
  33. उसके अलावा बाकी लड़कियां (भले ही मल्लिका शेरावत टाइप की दिखें) आपको बेकार दिखने लगे।
  34. ईश्वर मे आस्था बढ जाए। मंदिरो/मजारों पर आना जाना बढ जाए।
  35. आप मन्नतों के धागे बांधने शुरु कर दें।
  36. आप दोस्तों से झूठ बोलने लगे।

वैसे तो इस लिस्ट को एक ही बैठक मे पूरा करना था, कम से कम 101 लक्षण लिखने थे, लेकिन क्या करूं, अभी अचानक कुछ जरुरी काम से जाना पड़ रहा है, क्या आप इस लिस्ट को आगे बढा सकते/सकती है? तो फिर आपके सहारे ये लेख यहीं तक लिख रहा हूँ, आप मदद करेंगे ना?

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वर्डप्रेस को 2.5 पर अपग्रेड का सरल तरीका

वैसे तो वर्डप्रेस 2.5 के संस्करण के बारे मे, मैने आपको अपनी पिछली पोस्ट मे बताया। इसको अपग्रेड करने का तरीका नीचे सिलसिलेवार बताया गया है। लेकिन यदि आप इसको स्वयं ना करना चाहे तो अब एक बेहतर जुगाड़ आ गया है। अब एक ऐसा प्लग-इन उपलब्ध है जो आपके वर्डप्रेस के वर्जन (1.5 या उससे नया) को नए संस्करण पर आटोमेटिक तरीके से अपग्रेड कर सकता है। इसका तरीका बहुत ही आसान है, ये वाला प्लग-इन डाउनलोड करिए। ये प्लग-इन आपके लिए ढेर सारे काम करेगा:

  • ये प्लग-इन पहले आपके वर्जन को चैक करेगा।
  • आपके उपलब्ध प्लग-इन के मौजूदा संस्करण को चैक करेगा।
  • किसी भी प्रकार की भावी समस्या के लिए , एक अपग्रेड रिपोर्ट बनाएगा।
  • आपके सभी प्लग-इन को असक्रिय करेगा।
  • आपके जरुर फोल्डर का बैक-अप लेगा, और उसे डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराएगा।
  • आपके डाटाबेस का बैक-अप लेगा, और उसे डाउनलोड के लिए उपलब्ध भी कराएगा।
  • वर्डप्रेस के नए संस्करण को डाउनलोड करेगा।
  • सभी सक्रिय प्लग-इन को असक्रिय करेगा
  • नए संस्करण को आपके ब्लॉग के फोल्डर पर स्थापित करेगा।
  • आपकी डाटाबेस को नए संस्करण के अनुसार अपग्रेड करेगा।
  • सभी संस्करण को एक एक करके सक्रिय करेगा।
  • सभी प्लग-इन के नए संस्करण की उपलब्धता के बारे मे दर्शाएगा और उन्हे आटोमेटिक अपग्रेड करना का लिंक देगा (ये वर्डप्रेस के नए वर्जन का फीचर है।)
  • अंत मे इसने जो भी काम किया है, उसका एक लॉग बनाकर डाउनलोड के लिए उपलब्ध करा देगा।

किसी भी प्रकार की समस्या आने पर आप, पुराने संस्करण पर वापस जा सकते है। इस प्लग-इन को डाउनलोड करने के लिए यहाँ पर जाएं। अधिक और जरुरी सवालों के लिए यहाँ देखें। मैने आज ही अपने सभी वर्डप्रेस के स्थापित ब्लॉग्स को नए संस्करण पर अपग्रेड कर दिया है। किसी भी प्रकार की असुविधा और समस्या के लिए टिप्पणी द्वारा सम्पर्क करिए।